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9 दिन बाद चट्टान में दो पेड़ो के बीच फसी मिली ब्यावरा के रचित की लाश

9 दिन बाद चट्टान में दो पेड़ो के बीच फसी मिली ब्यावरा के रचित की लाश

कबीर मिशन समाचार
रवि मालवीय जीरापुर संवाददाता

ब्यावरा। ब्यावरा के रहने वाले रचित का शव नौ दिन बाद कोटा के गरडिया महादेव मंदिर इलाके में मिला है। वह टेस्ट देने के लिए बोलकर हॉस्टल से कोचिंग के लिए निकला था। शव चट्टान पर 2 पेड़ों के बीच में अटका हुआ है। परिवार के 40 से 50 लोग और निगम की गोताखोर टीम लगातार रचित को तलाश रही थी। सिटी एसपी अमृता दुहन ने बताया कि सोमवार को जवाहर नगर SHO ने थाने व पुलिस लाइन की टीम के साथ गरडिया में सुबह से ही जॉइंट सर्च ऑपरेशन चलाया था। रचित के परिजन भी साथ में तलाश रहे थे।

सोमवार शाम साढ़े 4 बजे रचित (16) का शव ढूंढने में कामयाबी मिली। जिस जगह पर रचित ने अपना सामान छोड़ा था, वहां से डेढ़ से दो किमी दूर एक चट्टान और पेड़ के बीच रचित का शव अटका हुआ मिला है। उस जगह जाना कठिन है। सम्भवतः ऊंचाई से गिरने से रचित बीच में अटक गया। वहां से शव को निकालने में परेशानी आ रही है। बॉडी पुरानी होने से फूल चुकी है। SDRF की टीम को मौके पर बुलाया गया। शव रात के करीब 9 बजे निकाला जा सका। रात में ही पोस्टमॉर्टम कराया गया।

रचित एमपी के राजगढ़ स्थित ब्यावरा का रहने वाला था। एक साल से कोटा में रहकर JEE की तैयारी कर रहा था। वो महावीर नगर प्रथम इलाके में हॉस्टल में रहता था। रविवार 11 फरवरी को दोपहर में हॉस्टल से टेस्ट देने के लिए निकला था।बैग भी साथ लेकर गया था। सोमवार 12 फरवरी को उसका बैग, चप्पल, रस्सी, चाकू गरडिया महादेव मंदिर के आसपास
मिला था।

दुर्गंध से पता लगा

निगम गोताखोर, पुलिस के 60-70 जवान व परिजनों ने सुबह से ही तलाश शुरू की। दुर्गंध आने पर रचित की डेड बॉडी का पता लगा। रचित की बॉडी 100 फीट नीचे एक चट्टान पर दो पेड़ के बीच फंसी हुई थी। चंबल नदी में बोट के जरिए शव को कोटा आरएसी तक लाया गया।

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