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बेहोशी का इंजेक्शन लगाने के बाद होश में ही नही आई बालिका, पुलिस नही किया सहयोग तो न्याय के लिए परिजनों ने सड़क जामकर कि, कांग्रेस नेता जोकचन्द्र व गुर्जर ने परिजनों के साथ सड़क पर बैठ दिया धरना

बेहोशी का इंजेक्शन लगाने के बाद होश में ही नही आई बालिका, पुलिस नही किया सहयोग तो न्याय के लिए परिजनों ने सड़क जामकर कि, कांग्रेस नेता जोकचन्द्र व गुर्जर ने परिजनों के साथ सड़क पर बैठ दिया धरना

नीमच। नीमच के एक निजी नर्सिंग होम में गलत इंजेक्शन लगाने के बाद 6 वर्षीय बालिका की मौत हो गई। बालिका की मौत के बाद आक्रोशित परिजनों व कांग्रेस नेताओं ने सड़क पर जाम लगा दिया, पुलिस पहुँची, बाद में एसडीएम ने डॉक्टर की खिलाफ कार्रवाई व अस्पताल सील करने का आश्वासन दिया, जब जाकर जाम हटाया।


इंजेक्शन लगाया, उसके बाद नही आया होश


जानकारी के अनुसार मल्हारगढ़ थाना क्षेत्र के गांव सूंठोद निवासी सुन्दरलाल पाटीदार की 6 वर्षीय बेटी भाविका को गले में टांसिल होने से परिजन नीमच मेहनत नगर स्थित प्रधान नर्सिंग होम पर ले गए थे। जहां डॉक्टर ने 10 अगस्त को ऑपरेशन की सलाह दी थी। सुबह 11 बजे ऑपरेशन से बालिका को डॉ. किशोर सोनी ने एनेस्थिसिया का इंजेक्शन लगाया। उसके बाद बालिका बेहोश हो गई और हॉर्ट ने काम करना बन्द कर दिया। डॉ. एलविश चौधरी, मुकेश पाटीदार, विपुल गर्ग आदि डॉक्टरों ने टीम ने बालिका को चेक किया, बालिका के दिल व दिमाग ने काम करना बन्द कर दिया था। डॉक्टरों ने बालिका को उदयपुर ले जाने की सलाह दी। हास्पीटल प्रबंधक डॉ. पीयूष प्रधान ने बालिका के परिजनों को आश्वासन दिया कि हमारी टीम बालिका को लेकर उदयपुर साथ रहेगी व बालिका के इलाज का खर्च भी हास्पीटल उठाएगा। बालिका को उदयपुर के गीताजंलि हास्पीटल ले गए जहां शाम 5 बजे करीब चिकित्सक ने बालिका को मृत घोषित कर दिया। परिजनों ने आरोप लगाया कि बालिका की मौत नीमच ही हो चुकी थी, लेकिन जानबुझकर हास्पीटल प्रबंधन ने अपनी नाकामी छुपाने के लिए उदयपुर रेफर किया।

पुलिस की लापरवाही से उदयपुर में परेशान होते रहे परिजन


शाम 5 बजे बालिका के मौत के बाद उदयपुर गीताजंलि हास्पीटल प्रबंधन ने नीमच पुलिस द्वारा घटना को लेकर तस्दीक नही किए जाने तक बालिका की लाश देने से इंकार कर दिया। बालिका के पिता ने पहले नीमच सिटी थाने पर कॉल कर गीताजंलि हास्पीटल पर बात करने की कही, लेकिन नीमच थाने पर पदस्थ जवान ने हास्पीटल में बात नही की व परिजनों से बदतमीजी की। इसके बाद परिजनों ने नीमच एसपी को कॉल किया, लेकिन एसपी ने भी कॉल रिसिव नही की। बाद में परिजनों ने पुलिस कंट्रोल रुम नीमच पर कॉल किया, तब जाकर तीन घंटे बाद नीमच कंट्रोल रुम ने उदयपुर गीताजंलि हास्पीटल प्रबंधन से बात की, तब जाकर बालिका का शव दिया। तब तक रात 8 बज चुके थे। बाद में परिजन रात्रि 1 बजे लाश को लेकर नीमच जिला अस्पताल पहुँचे। परिजनों ने आरोप लगाया कि पुलिस व प्रशासन हास्पीटल प्रबंधन का बचाव करते रहे, हमारी कोई सुनने वाला नही था, इस कारण हमें सुबह विरोध प्रदर्शन करने के लिए बाध्य होना पड़ा।


कार्रवाई की मांग को लेकर 6 घंटे तक किया परिजनों ने विरोध प्रदर्शन


शुक्रवार सुबह परिजन बालिका का शव ले जाने लगे तो पुलिस ने शव को देने से इंकार कर दिया, इससे परिजन और आक्रोशित हो गए। आक्रोशित परिजनों ने सुबह 8 बजे केंन्ट पुलिस के सामने प्रदर्शन किया व नारेबाजी की। परिजनों की मांग थी कि गलत उपचार करने वाले डॉक्टर किशोर सोनी व हास्पीटल प्रबंधन के खिलाफ कार्रवाई की जाए। सूचना पर नीमच एसडीएम ममता खेड़े, नीमच एडिशनल एसपी नवलसिंह सिसोदिया, डीएसपी विमलेश उईके, ट्राफिक सुबेदार मोहन भर्रावत, तहसीलदार संजय मालवीय, नीमच सिटी, नीमच केंट व बघाना थाना प्रभारी जाप्ते के मौके पहुँचे, लेकिन परिजनों ने जाम नही खोला। सूचना पर प्रातः 11 मल्हारगढ़ विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस प्रत्याक्षी श्यामलाल जोकचन्द्र, नीमच कृषि मंडी के पूर्व अध्यक्ष उमरावसिंह गुर्जर, कांग्रेस नेतागण हरगोविन्द दिवान, तुलसीराम पाटीदार, विजेश मालेचा, विनोद पाटीदार, अर्जुन पाटीदार, देवीलाल पाटीदार, महेश पाटीदार, राजेश भारती सहित बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने विरोध प्रदर्शन किया। दोपहर डेढ़ करीब करीब एसडीएम ने परिजनों को आश्वासन दिया कि हास्पीटल प्रबंधन के खिलाफ कार्रवाई होगी, तब जाकर जाम हटाया, पीएम के बाद बालिका का सूंठोद में अंतिम संस्कार किया।


यमराज बना डॉक्टर सोनी


चर्चित, विवादित डॉक्टर किशोर सोनी पहले कनघट्टी में पदस्थ थे, वहां महिला की मौत के बाद विरोध हुआ, मारपीट हुई तो पिपलियामंडी में भी नर्सिंग होम खोला था, यहां भी फाटक मोहल्ले की एक महिला को आक्सीजन नही लगाई थी तो उसकी मौत हो गई थी, परिजनों ने विरोध कर डॉक्टर को पीटा था। कुछ दिनों बाद फिर नारायणगढ़ की महिला की मौत के बाद परिजनों ने चिकित्सक को पीटा था व पुलिस ने नर्सिंग होम सील कर दिया था। उसके बाद रातों-रात डॉक्टर सोनी सारा सामान ले गया था, उस मामले में भी आज तक कार्रवाई नही हुई। इसके अलावा भी कई मामलों में मरीजों के मौत होने पर लेन-देन कर मामलों को दबा दिया गया। डॉक्टर सोनी को क्षेत्र के लोगों ने यमराज की उपाधि दी थी।

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