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October 3, 2022

राजगढ़ जिले के नरसिंहगढ़ में मनाया गया बुजारिया पर्व

राजगढ़ : जिले के नरसिंहगढ़ में कुछ समाज द्वारा आज भी बड़े उत्साह के साथ बुजरिया का पूर्व मनाया जाता है , बुजारिया बो कर उसे परशुराम तालाब में विसर्जन करने व बुजारिया निकलने के लिए महिलाएं नाचती गाती जाती हैं।भुजरिया पर्व का मालवा, बुंदेलखंड और महाकौशल क्षेत्र में विशेष महत्व माना गया है।

इसके लिए घरों में करीब एक सप्ताह पूर्व भुजरियां बोई जाती हैं। इस दिन भुजरियों को कुओं, ताल-तलैयों आदि पर जाकर निकालकर सर्व प्रथम भगवान को भेंट किया जाता है। इसके बाद लोग एक दूसरे से भुजरिया बदलकर अपनी भूल-चूक भुलाकर गले मिलते हैं।रूठों को मनाने और नए दोस्त बनाने के लिए भी इस महोत्सव का विशेष महत्व है।

संध्या के समय लोग सज-धजकर नए वस्त्र धारण कर इस त्यौहार का आनंद उठाते देखे जाते हैं। वहीं कई स्थानों पर विभिन्न क्षेत्रीय पार्टियों और दलों द्वारा विभिन्न स्थानों पर भुजरिया मिलन समारोह का आयोजन भी किया जाता है। भुजरिया पर्व को लेकर नगर-गांव की नदी, तालाबों पर महिलाओं की भारी भीड़ पहुंचती है। बच्चों में इस पर्व का खासा उत्साह देखा जाता है।इससे जुड़ी एक प्राचीन कहानी हैभुजरिया पर्व से ही मनाते आ रहे हैं को किन्नर समुदाय बड़ी ही धूम-धाम से मनाता है। इस दिन किन्नर सज-धजकर बड़ी की धूमधाम से जुलूस निकालते हैं। माना जाता है कि राजा भोज के शासनकाल में भोपाल में अकाल पड़ा था।

उस समय बिल्कुल बारिश नहीं हुई थी और हर तरफ पानी को लेकर काफी परेशानी हो रही थी। उस वक्त यहां रहने वाले किन्नरों ने मंदिरों में जाकर बारिश के लिए प्रार्थना की थी। उनकी प्रार्थना के कारण कुछ समय बाद अच्छी बारिश हुई। इसी ख़ुशी में पहली बार यह पर्व किन्नर रोने ने बड़ी धूम मनाया था तब से अब तक लगातार भोपाल में किन्नर हर साल भुजरिया पर्व मनाते आ रहे है।