उर्वरक क्रय करें एवं उर्वरक का उपयोग किसान मितव्ययता से करें, क्रय किये गये उर्वरक का पक्का बिल अवश्य लें

उज्जैन 04 नवम्बर। उज्जैन जिले में रबी मौसम में 449210 हेक्टेयर क्षेत्र में बुवाई का लक्ष्य रखा गया है। इसमें मुख्यत: गेहूं फसल 402000 हेक्टेयर, चना फसल 25000 हेक्टेयर एवं मटर 13000 हेक्टेयर मुख्य रूप से है। रबी मौसम में फसल की बुवाई का कार्य प्रगति पर है। कुछ क्षेत्रों में गेहूं फसल में सिंचाई का कार्य प्रगति पर है। गेहूं की फसल में प्रथम एवं द्वितीय सिंचाई में यूरिया की आवश्यकता होती है। जिले में निरन्तर एनपीके, डीएपी एवं यूरिया उर्वरक प्राप्त हो रहा है और जिले के किसानों को आवश्यकता अनुसार सम्बन्धित सहकारी समितियों एवं निजी उर्वरक विक्रेताओं के द्वारा उर्वरक वितरण किया जा रहा है।

उर्वरक का विक्रय निर्धारित दर पर ही करें, विक्रेता की शिकायत आने पर कार्यवाही होगी

कलेक्टर के निर्देशानुसार 20 अक्टूबर को जिले के निजी होलसेल विक्रेताओं एवं कृषि आदान विक्रेता संघ के पदाधिकारियों एवं उर्वरक कंपनियों के प्रतिनिधियों की बैठक लेकर निर्देश दिये गये हैं। निर्देशों में कहा गया है कि जिले में निजी उर्वरक विक्रेताओं के पास आने वाले उर्वरक की जानकारी मात्रा सहित तत्काल सम्बन्धित वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी को उपलब्ध करा कर वितरण सम्बन्धित अधिकारी की उपस्थिति में ही करायें। अपने-अपने प्रतिष्ठानों पर भाव/स्टॉक की सूची का स्पष्ट प्रदर्शन अनिवार्य रूप से करें। उर्वरक का विक्रय निर्धारित दर पर ही करें। साथ ही विक्रय किये गये उर्वरक का रिकार्ड संधारित रखें। कहीं पर भी किसी भी उर्वरक विक्रेता की शिकायत आने पर उर्वरक (नियंत्रण) आदेश-1985 के अनुसार कार्यवाही की जायेगी।

किसान कल्याण तथा कृषि विभाग के उप संचालक ने किसानों से अनुरोध किया है कि किसान आवश्यकता अनुसार ही उर्वरक क्रय करें और उर्वरक का उपयोग मितव्ययता से करें और क्रय किये गये उर्वरक का पक्का बिल आवश्यक रूप से ले।