संविधान दिवस विशेष- लोकतंत्र का संविधान और समाजतंत्र का मनुविधान

लोकतंत्र का संविधान और समाजतंत्र का मनु विधान आज भारत भर में 26 नवम्बर को संविधान दिवस के रूप में मनाया गया होगा। इस तारीख को संविधान का मसौदा तैयार कर लिया गया था। 26 जनवरी को लागू किया गया था। यह सब जानते हैं और मानते हैं। आजाद भारत की दुहाइयां देते हैं। क्या भारत को समझ पाना इतना आसान है? या यूं कहें कि अब भारत पुर्ण रूप से आजाद हैं? संविधान की प्रस्तावना में पहली लाइन बहुत महत्वपूर्ण हैं। “” हम भारत के लोग”” भारत की भूगोल (ज़मीन) पर रहने वाले लोग। ये लोग कौन हैं या कौन कौन है?

भारत का भूगोलिक भूखंड अंग्रजों से आजाद हो चुका है और प्रति वर्ष 15 अगस्त को आजादी का जश्न मनाया जाता है। अब जो समय चल रहा है इसमें आजादी का अमृत महोत्सव मनाया जा रहा है। किसी भी हालत को समझने के लिए इतिहास में जाना बहुत जरूरी होता है लेकिन इतिहास को थोड़ा थोड़ा सभी जानते हैं लेकिन इतिहास की घटनाएं, बुराईयों, अत्याचार, पाखंड, रूढ़ीवादी परम्पराओं, धर्म जाति की राजनीति आदि को वर्तमान में दोहराया जा रहा है तो इसका मतलब यह है कि हम आज भी इतिहास में ही जी रहे हैं।

वर्तमान तो केवल एक सपना है। मेरा इस लेख के माध्यम से मूल बात यह बताना है कि “”हम भारत के लोग”” आज भी गुलाम है और न जाने कब तक रहेंगे? मैं ऐसा इसलिए कह रहा हूं क्योंकि आज भी दलित आदिवासी वर्ग पर गुलामों जैसा व्यवहार किया जाता है और इस बात से कोई अछुता नहीं है। संविधान का 75 वां अमृत महोत्सव मनाया जा रहा है। लेकिन भारत में संविधान के मूल रूप को 75 प्रतिशत भी लागू नहीं किया है या अमल में नहीं लाया गया है।

संविधान के दिए अधिकारों को पाने के लिए शासन प्रशासन के दर पर ठोकरें खाने को मजबूर हैं। और जब तक उसको अधिकार मिलते शायद वहां पंचतत्व में विलीन हो जाता या आधी जिंदगी संघर्ष में गुजर जाती हैं। वहीं दूसरी ओर से मनु का विधान भारत के लोगों के दिल, दिमाग, खुन, हड्डी, मांस, मल, मूत्र तक भरा हुआ है और चाहते हुए भी उस विधान को लांगा नहीं जाता है। लोकतंत्र के रूप में संविधान पुर्ण रूप से लागू हैं। वहीं सामाजिक तानेबाने के रूप में आधा भाग भी अमल में नहीं आता है।

वहीं दूसरी ओर समाजिक रूप से मनु विधान 100 % लागू हैं और संविधान की यदि लोगों से यह सवाल भी कर ले कि संविधान क्या है तो इसका जवाब …………… (खुद ही लोगों से पुछे ) वहीं सत्यनारायण की कथा का आप गांव के किसी भी अनपढ़ व्यक्ति से भी पुछेंगे तो उसके बारे में उसे सब जानकारी है।लोकतंत्र का संविधान और मनु का विधान समझे 1- दलित आदिवासी को आरक्षण है लेकिन कागजों पर बहुत कम अमल किया जाता है अब तो इस पर बहुत आरोप प्रत्यारोप शुरू हो गया है।2- छुआछूत – संविधान के अनुसार आर्टिकल 17 से छुटकारा मिल गया है लेकिन मनु विधान की आज भी कई घटनाएं सोशल मीडिया पर आती है। राजस्थान, मप्र, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक, झारखंड, बिहार यह तक की दिल्ली जैसे महानगरों में भी जारी है।

3- जातिवाद – संविधान में जातिवाद नहीं है लेकिन मनु विधान का जाति जाल विद्दमान है। 4- भेदभाव – संविधान भेदभाव नहीं करता है और वही मनु विधान को मानने वाले संविधान को स्वीकार नहीं करते हैं। 5- धर्म – संविधान सभी को अपने अनुसार धर्म उपासना की आजादी देती हैं वहीं दूसरी ओर मनु विधान को मानने वाले संविधान को बनाने वाले को गाली देते हैं। अम्बेडकर की प्रतिमा तोड़ते हैं। जय भीम बोलने पर रोकते हैं। इसमें शासन प्रशासन भी भागीदारी करता है लेकिन अंदरूनी तौर पर।

6- संविधान के अनुसार दलित आदिवासी वर्ग को सब कुछ मिल गया लेकिन उन्हें आज भी अपने अधिकार पाने के लिए मौत के रास्ते तक गुजरना पड़ता है। 7- सरकारी कार्यालय- शासकीय कार्यालयों में कुल पद में कौन और कितने बैठें हैं। जबकि एससी एसटी वर्ग के पद आज भी खाली है। 8- योजना – निम्न वर्ग के लिए योजना बनती हैं और उसका फायदा उच्च वर्ग को चुपचाप दे दिया जाता है। पीएम आवास के लिए आज केवल इंतजार ही कर रहे हैं। वहीं उच्च वर्ग के फर्जी बनाकर बैठ गए।

9- मुआवजा/अनुदान – सरकार भी अपर कास्ट और लोवर कास्ट में भेदभाव करती हैं। उच्च वर्ग की मौत पर करोड़ों का मुआवजा और सरकारी नौकरी वहीं दलित आदिवासी को लाखों तक ही सीमित कर देते हैं सरकारी नौकरी की बात तो छोड़ दीजिए। 10- नौकरी/रोजगार- जब दलित आदिवासी पढ़ें लिखे नहीं थे तो हजारों नौकरियां थी और उनके पद पर उच्च वर्ग के लोगों को काबिज कर दिया। वहीं आज यह वर्ग उच्च शिक्षा प्राप्त कर घर बैठे हैं क्योंकी भर्ती नहीं खोलते, बैकलाग पद नहीं भर रहें, भर्ती निकलती है तो फर्जीवाड़ा कर देते हैं या रिजल्ट घोषित नहीं करते।

और आज पुरा सिस्टम एलपीजी पर कर सरकार चला रहे हैं। प्राइवेट सेक्टर का नियंत्रण कर दिया है ताकि दलित आदिवासी संविधान के अधिकारों की दुहाइयां नहीं दे सकें। आदि ऐसे अनेक बातें, घटना और विषय है जो जगजाहिर है और कुछ इतिहास और कागजों में दफ़न है। लेखक- रामेश्वर मालवीय, सारंगपुर जिला राजगढ़ मप्र। भोपाल से पत्रकारिता में स्नातकोत्तर किया है। मोबाइल नंबर – 8462072516