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पैसे, विज्ञापन और टी.आर.पी.के गेम में कोई मर रहा हैं तो वे पत्रकार।

पैसे, विज्ञापन और टी.आर.पी.के गेम में कोई मर रहा हैं तो वे पत्रकार।

रुकना मेरी मंजिल नहीं लिखना ही मेरा मुकाम हैं अंदाज-ए-जिंदगी

कबीर मिशन समाचार। प्रदीप कुमार नायक। स्वतंत्र लेखक एवं पत्रकार

जिंदगी जीने का हर एक का अपना अलग अंदाज होता हैं।जिसे आजकल आमतौर पर “लाइफ स्टाइल” कहाँ जाता हैं।लेकिन कुछ लोग अपने जीने के अंदाज के साथ-साथ अपने कामकाज का भी एक खास अंदाज विकसित कर लेते हैं।धीरे-धीरे कामकाज का उनका यही अंदाज उनके जीने का अंदाज बन जाता हैं। पत्रकारिता जगत पर नज़र डालें तो स्वतंत्र लेखक एवं पत्रकार, प्रदीप कुमार नायक के जीने और लिखने का अपना अलग अंदाज हैं।इसे उनकी “स्टाइल” भी माना जा सकता हैं।अपने इस खास लेखन और अंदाज की वजह से वे लोगों के बीच अपनी खास पहचान भी रखते हैं।

पत्रकारिता का नाम सुनकर लोगों के दिमाग में चैनल, अखबार और पत्र-पत्रिका के पन्ने घूमने लगते हैं।यह नाम सोचते ही सबसे पहले आपके दिमाग में शोहरत और पैसे वाला एक प्रोफेशन ध्यान में आता हैं।लेकिन इन सबके पीछे पत्रकार की मेहनत छूपी रह जाती हैं। दर असल वह लोगों की नज़र में ही नहीं आती हैं। यह हकीकत हैं कि पत्रकार होना केवल एक नौकरी नहीं बल्कि यह सामाजिक जिम्मेदारी हैं जो बिना जज़्बे और जुनून के नहीं की जा सकती।इस पेशे के साथ नैतिकता और ईमानदारी सबसे जरूरी हैं। जरूरी हैं कि पत्रकार अपने धर्म को समझे और उसे बखूबी निभाएं।लेकिन आज यह चीजे कम ही देखने को मिलती हैं।आलम यह हैं कि जिस समाज के लिए पत्रकारिता का जन्म हुआ हैं।उसी का विश्वास उस पर से उठता जा रहा हैं।

आज पत्रकारिता भी कई गुटों में बटी नज़र आती हैं। पैसे, विज्ञापन और टी.आर.पी.के गेम में कोई मर रहा हैं तो वे पत्रकार।

पर गनीमत हैं कि आज भी कुछ पत्रकार जीवित हैं।जिन्होंने अपने साथ-साथ असल पत्रकारिता को भी जिन्दा रखा हैं।आज हम ऐसे ही एक शख्त की बात करने जा रहें हैं जो पत्रकारिता पैसों के लिए नहीं बल्कि अपने जुनून के लिए करते हैं।प्रखर लेखनी के धनी,पत्र-पत्रिकाओं, समाचार पत्र,साहित्य सेवा तथा स्वतंत्र लेखक एवं पत्रकारिता के क्षेत्र में समर्पित कई विधाओं एवं भाषाओं मसलन हिन्दी, मैथिली और नेपाली भाषा में अपनी लेखनी से पहचान बनाने वाले इस स्वतंत्र लेखक एवं पत्रकार का नाम हैं प्रदीप कुमार नायक।जी हाँ, मधुबनी जिले के राजनगर निवासी प्रदीप कुमार नायक पत्रकारिता की अनूठी मिसाल पेश कर रहें हैं।कवि एवं पत्रकारिता के रूप में प्रसिद्ध प्रदीप कुमार नायक के पास न कोई दफ़्तर हैं न ही कोई मशीन।न ही इसके लिए उनके मातहत कोई कर्मचारी काम करता हैं।जो भी हैं वह अकेले खुद हैं।वह कहते हैं कि इसका एक मात्र सिपाही मैं ही हूं।

प्रदीप कुमार नायक पैतीस साल से ज्यादा समय से समाज के लोगों को अपनी यह सेवाएं दे रहे हैं। जी हाँ, वह वर्तमान समय में दर्जनों पत्र पत्रिका,समाचार पत्र एवं चैनलों में अपनी लेख,रचना और समाचार लिख रहें हैं।उनके द्वारा ज्वलंत मुद्दें अन्याय,अत्याचार,भ्रष्टाचार, घुसपैठ, शोषण पर लिखे गए लेख काफी पसंद किए जाते हैं।

कभी- कभी पत्र पत्रिका एवं समाचार पत्र में इन्हें जगह नहीं मिल पाती इसलिए वह अपना अखबार चला रहे हैं।वह अपने नाम से ही अखबार एवं पत्र पत्रिका की तरह लेख,रचना एवं समाचार लिखते हैं। प्रदीप कुमार नायक के इस अखबार की सबसे बड़ी खासियत यह हैं कि यह पूरा अखबार वे खुद अपने हाथों से लिखते हैं।इस हस्तलिखित अखबार की फ़ोटो स्टेट कापियां करवाकर वे उसे लोगों तक पहुंचाते हैं।इस काम में उसका एक मात्र साथी कापी के पन्नें और कलम ही हैं। वह अधिकतर पैदल ही जगह-जगह जाकर अपना अखबार सार्वजनिक स्थान पर कुछ लोगों को देते हैं। एक दुर्घटना के कारण उनकी एक पैर को आँपरेशन के बाद रॉड लगाना पड़ा और हाथों में स्टील।उनकी आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं हैं।आजीविका किसी तरह चल रहीं हैं। फिर भी हौसला बुलंद हैं।

अपनी कलम की ताकत से समाज व देश से जातपात, छुआछूत, अन्याय, अत्याचार, भ्रष्टाचार, शोषण, घुसपैठ, अंध-विश्वास जैसी समस्याओं और कुरीतियों को जड़ से खत्म करने तथा मिटाने का इरादा रखने वाले स्वतंत्र लेखक एवं पत्रकार, प्रदीप कुमार नायक अपनी लेखन के माध्यम से समाज में चेतना,जागृति तथा जागरूकता फैलाने के साथ साथ समाज को नई रोशनी देने का कार्य करते रहते हैं। वे पत्रकारिता संगठन के अलावा हिन्दी दिवस के अवसर पर,काव्य कला निखार मंच,उत्तर प्रदेश द्वारा गणेश शंकर विद्यार्थी सम्मान-2020 से सम्मानित भी हो चुके हैं।हिन्दी जगत के चर्चित अखबार नव भारत टाइम्स ने इन्हें वर्ष 1987 में अच्छे लेखन के लिए बिहार प्रतिभा प्रतियोगिता का प्रमाण पत्र देकर सम्मानित भी कर चुके हैं।

वे काफी वर्षों से नेपाल में भी पत्रकारिता करते थे।नेपाल में जनयुद्द के समय मधेशियों के ऊपर हो रहे अन्याय, अत्याचार,जुर्म और शोषण को उजागर करने के कारण उन्हें माओवादियों द्वारा कई बार धमकियां भी मिले।पंद्रह दिनों तक जबरदस्ती माओवादियों ने जंगल की ओर मानव ढाल के रूप में ले भी गया। फिर भी वे घबराएं नहीं।

मधुबनी जिले की कई क्षेत्रों के अत्याचारी, भ्रष्टाचारी, दलालों, असमाजिक तत्वों, काले कारनामें वाले व्यापारियों, समाज के लुटेरे, कमीशन खोर एवं जातीय संगठन से जुड़े कई लोगों द्वारा उन्हें अनेकों बार धमकियां मिलते रहे हैं।

वो शुरुआत से ही समाज के लिए कुछ करना चाहते थे। पारिवारिक एवं सामाजिक उलझनों के बावजूद उन्होंने अपने जुनून को मरने नहीं दिया। सुबह से शाम तक आजीविका के लिए कड़ी मेहनत करने वाले प्रदीप कुमार नायक, स्वतंत्र लेखक एवं पत्रकार को लेख,रचना एवं समाचार लिखने तथा अखबार चलाने के लिए किसी भी प्रकार की सरकारी या गैर सरकारी वित्त सहायता प्राप्त नहीं हैं। अपने गैर विज्ञापनी अखबार से प्रदीप कुमार नायक किसी भी प्रकार की आर्थिक कमाई नहीं कर पाते हैं। फिर भी अपने हौसले और जुनून की बदौलत वह सामाजिक बदलाव के लिए नियमित रूप से लेख,रचना एवं समाचार लिखते हुए इस अखबार को निकाल रहे हैं।खोजी पत्रकारिता के लिए वह जिलाधिकारी कार्यालय से लेकर बॉर्डर इलाके तक जाते हैं और अपनी खबर को लिखते हैं।मात्र कोरे कागज के पन्नें और कलम ही उनके पत्रकारिता का शस्त्र हैं।

पत्रकार सुरक्षा कानून एक मात्र हथियार हैं। जिससे कलम के सिपाहियों की रक्षा हो सकती हैं। पत्रकार सुरक्षा कानून लागू कराने के लिए हमें कोई ठोस कदम उठाने की जरूरत हैं। सभी पत्रकारों को सरकार कोरोना योद्धा मानकर उन्हें सम्मनित करें।

हर दिन रोजी-रोटी चलाने के अलावा प्रदीप कुमार नायक, स्वतन्त्र लेखक एवं पत्रकार पिछले पैतीस वर्षों से ज्यादा समय से अपने हस्तलिखित अखबार अपने नाम से चला रहे हैं।यह बात काबिले तारीफ़ हैं।तमाम चुनौतियों के बावजूद प्रदीप कुमार नायक ने न तो कभी हौसला हारा, न कभी पत्रकारिता छोड़ने के बारें में सोचा।प्रदीप कुमार नायक, स्वतंत्र लेखक एवं पत्रकार का कहना हैं कि मैं हर हमेशा अपनी लेखन के माध्यम से साहित्य,समाज और देश की सेवा करता रहूं।मेरे लेखन से किसी के जीवन में प्रकाश लाता हैं, समाज और देश सेवा हो पाता हैं तो मैं अपनी जीवन को धन्य समझूंगा।

भारत में लोकतंत्र यदि अब तक जीवित हैं तो इसके श्रेय में पत्रकारिता प्रमुख स्थान रखती हैं।मीडिया के लिए स्वतंत्रता तो जरूरी हैं।लेकिन उच्श्रृंखलता से बचाव करना चाहिए।निजी जीवन के स्वार्थो से ऊपर उठकर विश्व बंधुत्व का प्रसार करने में मीडिया निर्णायक भूमिका निभा सकती हैं।

लेखक – स्वतंत्र लेखक एवं पत्रकारिता के क्षेत्र में विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं, समाचार पत्र एवं चैनलों में अपनी योगदान दे रहें हैं। मोबाइल – 8051650610

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