बचपन छीनता मोबाईल। मोबाईल की लत भविष्य को खौंखला कर सकती है ।

राजस्थान। लेख। कबीर मिशन समाचार।
आजकल के दौर में देखा गया है कि बच्चे अपने उस मानसिक स्तर पर नही पहुंच पाते है, वजह इसके पीछे मोबाईल का होना हो सकता है, यह एक ऐसा विषय है, जिस पर बात होना बहुत जरुरी है,जहां जो बच्चे होते है भविष्य बनाने के लिए वे एक लत में मलिन हो चुके होते है और यह बच्चो मे लगातार बढ रहा है | यह बेहद गंभीर और चिंतन का विषय है, अगर माता पिता बच्चे को मोबाईल देने में जरा सा भी देर कर दें तो पूरा घर सर पर उठा लेते है, खाना तक छोड़ देते है, अपनी सेहत की प्रवाह तक नही करते, माता पिता से कई दिनो तक नाराज होकर बैठ जाते है, ख़ासतौर पर यह देखा गया है कि मां – बाप को जब घर का जरुरी काम करना होता है तब वे अपने बच्चे को मोबाईल हाथ मे थमा देते है, जिससे काम करने मे आसानी हो जाए |

यकीनन हकीकत मानिए इन सबके साथ बच्चा धीरे-धीरे इसके जाल में फंसता चला जाता है ज़्यादातर बच्चे खेलने के लिए अपने घर का प्रयोग करते हैं लेकिन वे माता-पिता की आंखों से हटते ही रिल्स, ऑनलाईन गेम्स और भी ऑनलाइन बहुत सारी चीज़ें देखने में काफी व्यस्त हो जाते हैं,
जरा सा भी इस दौरान बच्चों को रोक लिया जाए तो बच्चे माता पिता पर हावी होने लगते हैं अभी भी कुछ बच्चे तो आपने आप को नुकसान तक पहुंचा देते हैं इन सबके बीच माता-पिता को अपने बच्चे के साथ स्टडी रूम को भी ठीक से देखा जाना चाहिए ओर संभालना चाहिए, बच्चा कहीं अपने लक्ष्य से भटक तो नही रहा, पढ़ाई कर रहा हैं या नहीं ये ही जरुरी है |

खासकर मोबाईल की लत ऐसी है कि एकदम से छुड़ाने का प्रयास बिल्कुल भी ना करें, उन्हें बाहर की दुनिया से रू-ब-रू करवाने की कोशिश करें, आसपास में एक ऐसा वातावरण तैयार करें, जिससे कि बाहर के खेलों को भी जाना जा सके और स्वास्थ्य के लिए भी लाभ प्रद हो सके, बच्चे के साथ नए-नए अनुभव प्रयोग करे और स्वास्थ्य के लिए भी लाभप्रद हो सके बच्चे के साथ नए-नए क्रियाकलाप करते जाएं, उनके साथ घुलमिल रहने का प्रयास करें यह बहुत कारगर साबित होगा, आप इन सबसे मिलाकर अपने खोये परिवार को पा सकते हैं और मोबाईल की लत कम कर सकते हैं, इस दिशा मे बेहतर साबित होगा |

अविनाश बराला
लेखक,पत्रकार,सामाजिक कार्यकर्त्ता