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October 3, 2022

प्रधानमंत्री ने विद्युत क्षेत्र की पुनर्विकसित वितरण क्षेत्र योजना का शुभारम्भ किया

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज ‘उज्ज्वल भारत उज्ज्वल भविष्य – पावर@2047’ के समापन के अवसर पर हुए ग्रैंड फिनाले में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से भाग लिया। प्रधानमंत्री ने विभिन्न योजनाओं के लाभार्थियों के साथ संवाद किया। प्रधानमंत्री ने खोवाई, त्रिपुरा के मंडी के श्री हंसराज, रियांग के श्री कलाहा, वाराणसी की श्रीमती प्रमिला देवी और अहमदाबाद के श्री धीरेन सुरेशभाई पटेल के साथ संवाद किया। वे क्रमशः कुसुम, सौर ऊर्जा, डीजीयूजीजेवाई, आईपीडीएस और सौर पैनलों के लाभार्थी हैं।इस कार्यक्रम में केंद्रीय विद्युत और एनआरई मंत्री श्री आर के सिंह, विद्युत एवं भारी उद्योग राज्य मंत्री श्री किशन पाल गुर्जर उपस्थित रहे।

एमएनआरई राज्य मंत्री श्री भगवंत खुबा वर्चुअल माध्यम से शामिल हुए। इस कार्यक्रम में 12 मुख्यमंत्री, 5 केंद्रीय मंत्री, 3 उप मुख्यमंत्री, 3 उप राज्यपाल, 27 राज्य मंत्री और 81 अन्य गणमान्य नागरिक शामिल हुए। इसके अलावा एमएनआरई सचिव श्री इंदु शेखर चतुर्वेदी, विद्युत सचिव श्री आलोक कुमार, आरईसी लिमिटेड के सीएमडी श्री विवेक देवांगन, एनटीपीसी के सीएमडी श्री गुरदीप सिंह, आरईसी लि‍मिटेड के सीईओ श्री आर लक्ष्मणन और विद्युत मंत्रालय में जेएस श्री विशाल कपूर कार्यक्रम में शामिल हुए। उज्ज्वल भारत उज्ज्वल भविष्य का ग्रांड फिनाले राष्ट्रीय स्तर के समारोह के रूप में आयोजित किया गया, जिससे देश के 100 से ज्यादा जिलों के प्रतिभागियों और लाभार्थियों ने वर्चुअल माध्यम से जुड़े रहे।प्रधानमंत्री ने विद्युत मंत्रालय की पुनर्विकसित वितरण क्षेत्र योजना का शुभारम्भ किया, जिसका उद्देश्य वितरण कंपनियों की परिचालन दक्षताओं और वित्तीय स्थायित्व में सुधार करना है। वित्त वर्ष 2021-22 से वित्त वर्ष 2025-26 तक पांच साल की अवधि के लिए 3,03,758 करोड़ रुपये के बजट के साथ, इस योजना का उद्देश्य उपभोक्ताओं को आपूर्ति की विश्वसनीयता और गुणवत्ता में सुधार के उद्देश्य से वितरण इन्फ्रास्ट्रक्चर के आधुनिकीकरण और मजबूती के लिए डिस्कॉम्स को वित्तीय सहायता उपलब्ध कराना है।

इसमें देश भर के उपभोक्ताओं को 25 करोड़ स्मार्ट प्रीपेड मीटर उपलब्ध कराने का प्रस्ताव भी किया गया है।प्रधानमंत्री ने रूफटॉप सोलर के लिए एक राष्ट्रीय पोर्टल का भी शुभारम्भ किया, जिससे आवेदनों के पंजीकरण से लेकर प्लांट के इंस्टालेशन और निरीक्षण के बाद आवासीय ग्राहकों (लाभार्थियों) के बैंक खातों में सब्सिडी जारी करने तक रूफटॉप सोलर प्लांट्स लगाने की पूरी प्रक्रिया की ऑनलाइन निगरानी संभव हो जाएगी। राष्ट्रीय सोलर रूफटॉप कार्यक्रम के तहत अनुमानित क्षमता 4,000 मेगावाट है। यह देश की सोलर रूफटॉप क्षमता को साकार करने की दिशा में एक अहम कदम होगा और सीओपी-26 में गैर जीवाश्म ईंधन के लिए प्रतिबद्धता के माध्यम से 500 गीगावाट उत्पादन के लक्ष्य में अंशदान किया जा सकेगा।इस कार्यक्रम के दौरान, प्रधानमंत्री ने एनटीपीसी की 5,200 करोड़ रुपये की विभिन्न हरित ऊर्जा परियोजनाएं राष्ट्र को समर्पित की गईं और शिलान्यास किया गया। उन्होंने तेलंगाना में 100 मेगावाट की रामागुंडम फ्लोटिंग सौर परियोजना और केरल में 92 मेगावाट की कायमकुलम फ्लोटिंग सौर परियोजना का शुभारम्भ किया। उन्होंने राजस्‍थान में 735 मेगावाट की नोख सौर परियोजना, लेह में ग्रीन हाइड्रोजन मोबिलिटी परियोजना और गुजरात में प्राकृतिक गैस के साथ कावास ग्रीन हाइड्रोजन ब्लेंडिंग परियोजना का शिलान्यास किया।केंद्रीय विद्युत और एनआरई मंत्री श्री आर. के. सिंह ने कार्यक्रम में प्रतिभागियों का स्वागत किया और विद्युत क्षेत्र में की गई पहलों और उपलब्धियों को रेखांकित किया। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि आज विद्युत उत्पादन क्षमता बढ़कर 4,00,000 मेगावाट से ज्यादा हो गई है, जो हमारी मांग से 1,85,000 मेगावाट ज्यादा है। उन्होंने कहा कि 6 लाख सीकेएम एलटी लाइनों, 2,68,838 सीकेएम 11 केवी एचटी लाइनें और 1,22,123 सीकेएम एग्रीकल्चर फीडर्स के फीडर पृथक्करण के साथ इन्फ्रास्ट्रक्चर ढांचे को बढ़ाया जा चुका है।

उन्होंने बताया कि 2015 में ग्रामीण क्षेत्रों को औसत बिजली आपूर्ति 12.5 घंटे की थी, जो अब बढ़कर औसतन 22.5 घंटे हो गई है। उन्होंने कहा कि यह केन्द्र के साथ-साथ राज्यों की भी उपलब्धियां हैं।भारत की आजादी के 75वें साल के उपलक्ष्य में हो रहे ‘आजादी का अमृत महोत्सव’ के तहत, विद्युत और नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय राज्य और केन्द्र सरकारों के सहयोग और सक्रिय जन भागीदारी के माध्यम से 25 से 31 जुलाई, 2022 तक उज्ज्वल भारत उज्ज्वल भविष्य – पावर 2047 के अंतर्गत भारत के सभी जिलों में ‘बिजली महोत्सव’ का आयोजन कर रहा है। इन कार्यक्रमों के माध्यम से बिजली क्षेत्र की मुख्य उपलब्धियों को रेखांकित किया जा रहा है। देश के विभिन्न जिलों में 25 जुलाई, 2022 को बिजली महोत्सव का शुभारम्भ किया गया था। पिछले कुछ दिनों में जिला प्रशासन के समन्वय के साथ जिला स्तर पर 1,500 से ज्यादा कार्यक्रम/ गतिविधियां की जा चुकी हैं। इनमें माननीय केंद्रीय मंत्री, सांसद, राज्य मंत्री और विधायकों के साथ ही बड़ी संख्या में गणमान्य लोगों ने भाग लिया था।

परियोजनाओं का शुभारम्भ

रामागुंडम परियोजना 4.5 लाख ‘मेक इन इंडिया’ सोलर पीवी मॉड्यूल्स के साथ भारत की सबसे बड़ी फ्लोटिंग सोलर पीवी परियोजना है।कायमकुलम परियोजना दूसरी सबसे बड़ी फ्लोटिंग सोलर पीवी परियोजना है जिसमें पानी पर तैरते 3 लाख ‘मेड इन इंडिया’ सोलर पीवी पैनल शामिल हैं।राजस्थान में नोख, जैसलमेर स्थित 735 मेगावाट की सोलर पीवी परियोजना एक ही स्थान पर 1000 एमडब्ल्यूपी के साथ भारत की सबसे बड़ी डॉमेस्टिक कंटेंट रिक्वायरमेंट आधारित सौर परियोजना है। इसमें एक ट्रैकर सिस्टम के साथ हाई वाटेज बाइफेसियल मॉड्यूल्स लगाए गए हैं।लेह, लद्दाख स्थित ग्रीन हाइड्रोजन मोबिलिटी परियोजना एक पायलट परियोजना है और इसका उद्देश्य लेह में तथा उसके आसपास पांच फ्यूल सेल बसें चलाना है। यह पायलट परियोजना भारत में सार्वजनिक इस्तेमाल के लिए पहली फ्यूल सेल इलेक्ट्रिक व्हीकल की तैनाती होगी।एनटीपीसी कावास टाउनशिप में ग्रीन हाइड्रोजन ब्लेंडिंग पायलट परियोजना प्राकृतिक गैस के इस्तेमाल में कमी लाने में सहायक भारत की पहली ग्रीन हाइड्रोजन ब्लेंडिंग परियोजना होगी।

रूफटॉप सोलर के लिए राष्ट्रीय पोर्टल

इस पोर्टल के शुभारम्भ के साथ, आवासीय उपभोक्ता के लिए आवेदन करना और रूफटॉप सोलर लगवाना खासा आसान हो जाएगा। उपभोक्ताओं के पास स्थानीय वितरण कंपनी के साथ पंजीकृत किसी वेंडर, समानता और दक्षता वाले सोलर मॉड्यूल्स, सोलर इन्वर्टर और अन्य प्लांट्स एवं उपकरण चुनने का विकल्प होगा। वितरण कंपनी के साथ वेंडर्स के पंजीकरण की प्रक्रिया को आसान बना दिया गया है, उन्हें 2.5 लाख रुपये की पीजीबी धनराशि के साथ सिर्फ एक घोषणा पत्र जमा करना होगा और उनका पंजीकरण हो जाएगा। इन वेंडरों को अपनी जानकारी और दरें राष्ट्रीय पोर्टल पर उपलब्ध कराने की सुविधा मिलेगी, जिससे रूफटॉप सोलर लगवाने का इच्छुक कोई उपभोक्ता उनसे संपर्क कर सके और परस्पर सहमति वाली दरों पर रूफटॉप सोलर लगवा सके। उपभोक्ता के बैंक खाते में सब्सिडी जारी करने के लिए आवेदन के पंजीकरण की प्रक्रिया की पोर्टल पर ऑनलाइन निगरानी की जा सकती है।

इसमें निम्नलिखित कदम शामिल हैं :उपभोक्ता को अपना मोबाइल और ई-मेल पंजीकृत करना होता है और अकाउंट सक्रिय हो जाता है,लॉग-इन करें और आवेदन जमा करें। राज्य में लागू नियमों के तहत आवेदन स्वतः ही तकनीक व्यवहार्यता स्वीकृति के लिए स्थानीय वितरक कंपनी को भेज दिया जाएगा,एक बार तकनीक व्यवहार्यता स्वीकृति मिलने के साथ, यह स्वतः ही पोर्टल पर नजर आने लगेगा और उपभोक्ता को एक ई-मेल भेजा जाएगा,उपभोक्ता रूफटॉप सोलर सिस्टम लगवा सकता है और निरीक्षण तथा नेट-मीटर लगवाने के लिए ऑनलाइन पोर्टल पर विवरण जमा कर सकता है।डिस्कॉम के अधिकारी इंस्टालेशन का निरीक्षण करेंगे और नेट-मीटर लगाएंगे।नेट-मीटर लगने और डिस्कॉम द्वारा ब्यौरा अपलोड करने के बाद, उपभोक्ता सब्सिडी जारी कराने के लिए अपने बैंक खाते का ब्यौरा जमा कर सकता है।30 दिन के भीतर सीधे उपभोक्ता के बैंक खाते में सब्सिडी जारी कर दी जाएगी। सब्सिडी की दर देश भर में सभी उपभोक्ताओं के लिए समान होगी।डिस्कॉम में वेंडर्स के पंजीकरण को अनिवार्य बनाने के अलावा, उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के लिए वेंडर को कम से कम पांच साल तक रूफटॉप सोलर सिस्टम का रखरखाव करना होगा।

सरलीकृत प्रक्रिया में, डिस्कॉम्स को निविदा आमंत्रित करने की जरूरत होती है, दरें तय करनी होती हैं और वेंडरों का पैनल बनाना होता है। साथ ही, वेंडरों को मंत्रालय से सब्सिडी जारी होने की प्रतीक्षा नहीं करनी होती है। इसके बजाय उन्हें उपभोक्ता से पूर्ण भुगतान प्राप्त हो सकता है, क्योंकि उपभोक्ता को सब्सिडी सीधे अपने बैंक खाते में मिलेगी। इस सरलीकरण से देश में रूफटॉप सोलर के इंस्टालेशन में तेजी आएगी और रूफटॉप सोलर प्रोग्राम फेज-2 के तहत 4,000 मेगावाट के लक्ष्य को हासिल किया जा सकेगा। इस कार्यक्रम से 10 लाख परिवार लाभान्वित होंगे। रूफटॉप सोलर लगवाने के साथ, न सिर्फ एक परिवार की बिजली की बचत होगी बल्कि हरित ऊर्जा के विस्तार और राष्ट्रीय लक्ष्यों को हासिल करने की दिशा में योगदान भी किया जा सकेगा।

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