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अपने घर से शुरू करें पंच परिवर्तन – डॉ. पूर्णेंदू सक्सेना, राष्ट्रीय स्वयंसवेक संघ, मध्य क्षेत्र के ‘कार्यकर्ता विकास वर्ग-1’ के समापन

अपने घर से शुरू करें पंच परिवर्तन – डॉ. पूर्णेंदू सक्सेना, राष्ट्रीय स्वयंसवेक संघ, मध्य क्षेत्र के ‘कार्यकर्ता विकास वर्ग-1’ के समापन

भोपाल के शारदा विहार परिसर में मध्यक्षेत्र के 20 दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण वर्ग ‘कार्यकर्ता विकास वर्ग-1’ का समापन, छत्तीसगढ़, महाकौशल, मालवा और मध्यभारत प्रांत के 382 स्वयंसेवक हुए थे शामिल भोपाल, 12 जून।

राष्ट्रीय स्वयंसवेक संघ, मध्य क्षेत्र के ‘कार्यकर्ता विकास वर्ग-1’ के समापन कार्यक्रम में क्षेत्र संघचालक डॉ. पूर्णेंदू सक्सेना ने कहा कि हमें ‛पंच परिवर्तन’ की सीख घर से प्रारंभ होनी चाहिए। सामाजिक समरसता, नागरिक कर्तव्य, स्वदेशी, पर्यावरण और कुटुम्ब प्रबोधन का वातावरण घर से बनाना होगा। विभिन्न जाति समाज के लोग आपस में संवाद करके आगे की राह बनाएं। शारदा विहार आवासीय विद्यालय के परिसर में आयोजित समापन कार्यक्रम में मंच पर मुख्य अतिथि पूर्व कमांडर इन चीफ अंडमान और निकोबार कमांड वाइस एडमिरल बिमल वर्मा और वर्ग के सर्वाधिकारी श्री सोमकांत उमालकर उपस्थित रहे। इस अवसर पर स्वयंसेवकों ने 20 दिन के प्रशिक्षण का प्रदर्शन किया।

उन्होंने संचलन, घोष, समता, योग, आसन, नियुद्ध, पदविन्यास और राष्ट्रभक्ति गीत की सामूहिक प्रस्तुति दी। वर्ग कार्यवाह श्री रवि अग्रवाल में अतिथियों का परिचय कराया एवं वर्ग का प्रतिवेदन भी प्रस्तुत किया। इस अवसर पर क्षेत्र संघचालक श्री पूर्णेन्दू सक्सेना ने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पीछे की ओर देखने वाला संगठन नहीं है। संघ तो आगे की ओर देखकर कार्य करता है। उन्होंने कहा कि हिन्दू समाज आत्मग्लानि को त्याग कर गौरव की अनुभूति के साथ जाग उठा है। सूत्रपात की इस बेला में भी संघ आने वाले समय की ओर देख रहा है। समाज को सर्वस्पर्शी बनाना होगा। परिवार इकाई सशक्त हो। सामाजिक समरसता की बात अपने घर से शुरू हो।

स्वदेशी का आग्रह हो। कुटुम्ब का भाव बढ़ाना चाहिए। अपनी मातृभाषा को बढ़ावा दें। जब हिन्दू जागरण हो रहा है तो सबसे पहले इसका जागरण कुटुम्ब से होना चाहिए। उन्होंने कहा कि हिन्दू समाज की मजबूत संस्था है– मंदिर। हमारे मंदिर सामाजिक चेतना के संवाहक बनने चाहिए। हमारे देश में मंदिर की ओर से कई बड़े अस्पताल संचालित किए जा रहे हैं। हमारे आसपास के छोटे मन्दिर भी सेवा और राष्ट्रीय चेतना के केंद्र बनें, इसका हमें विचार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि तीर्थाटन भी भारत की परंपरा है। तीर्थ स्थालों के विकास के लिए हमें सरकार पर ही क्यों आश्रित रहना चाहिए। स्थानीय लोगों को वहां आनेवाले श्रद्धालुओं की चिंता करनी चाहिए। उन्होंने गुरु परंपरा के महत्व पर भी प्रकाश डाला।

उन्होंने अयोध्या में 500 वर्ष बाद श्रीराम मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा की बात कही और आग्रह किया कि हमें अपने मन मंदिर में श्रीराम की प्राण प्रतिष्ठा करनी चाहिए। हमारे मन विशाल बनें, जिनमें सबके लिए स्थान हो। वैश्विक पटल पर बढ़ते भारत के प्रभाव का उल्लेख भी उन्होंने किया। आज भारत आर्थिक ताकत के रूप में उभर रहा है। हमारे युवाओं को भारत के आर्थिक वातावरण का लाभ उठाना चाहिए। आनेवाले 25 वर्षों में भारत को आगे ले जाने के लिए आज की युवा पीढ़ी को विचार करना होगा। उन्हें नौकर नहीं अपितु नौकरी देने वाला बनना होगा। आज भारत भू–राजनैतिक परिदृश्य में भी मजबूत हुआ है। उन्होंने कहा कि भारत का युवा विदेश जाए तो अपने भारत को याद रखे। आज का भारत उसके पीछे ताकत बनकर खड़ा है।

भारत की चेतना का आधार है सबको साथ लेकर चलना :डॉ. पूर्णेन्दू सक्सेना ने कहा कि संघ आगे की ओर देखकर चलने वाला संगठन है। साम्प्रदायिक आधार भारत की चेतना नहीं है। भारत का आधार सबको साथ लेकर चलने का है। देश में जब साम्प्रदायिकता के आधार पर बंग भंग किया गया तो इस देश ने उसे अस्वीकार कर दिया। विचार करने की बात है कि जिस समाज ने 1910 तक साम्प्रदायिक विभाजन स्वीकार नहीं किया, उसी ने 1947 में साम्प्रदायिक आधार पर विभाजन स्वीकार कर लिया। हम अपना स्व भूल गए। इसलिए यह परिस्थिति बनी। उन्होंने कहा कि संघ की स्थापना करते समय डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने यही सोचा कि स्वतंत्र होने के बाद देश फिर से परतंत्र न हो। इस देश को अपना समझने वाले समाज में राष्ट्रीयता का भाव भरने के लिए उन्होंने 1925 में संघ की स्थापना की।

मानसिक स्वास्थ्य के लिए करें ध्यान और योग : श्री बिमल वर्मा

वाइस एडमिरल बिमल वर्मा ने कहा कि भारतीय सशस्त्र सेनाओं में धर्म और जाति का भेद नहीं है। सेना का अपना ही धर्म है। सेना की यूनिटें अलग–अलग प्रान्त से आती हैं। सेना की हर यूनिट में सर्वधर्म स्थल का निर्माण किया जाता है। एक ही छत के नीचे सभी धर्मों के श्रद्धा केंद्र रहते हैं। उन्होंने कहा कि अपने देश की सेना के प्रति आरएसएस को बहुत प्यार है। स्वयंसेवकों को सेना की संस्कृति के बारे में आम लोगों को भी बताना चाहिए। उन्होंने भ्रष्टाचार पर भी अपने विचार रखे। हमें भ्रष्टाचार के प्रति कठोरता लानी होगी। भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने में समाज ही महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। उन्होंने शिक्षार्थियों के योग प्रदर्शन की सराहना करते हुए कहा कि मानसिक स्वास्थ्य और शारीरिक स्वास्थ्य के लिए हम सबको नियमित योग करना चाहिए।

4 प्रांतों के 382 स्वयंसेवकों ने लिया प्रशिक्षण :

संघ की रचना में मध्य क्षेत्र में चार प्रांत हैं- छत्तीसगढ़, महाकौशल, मालवा और मध्यभारत। इन चारों प्रांतों से कार्यकर्ता विकास वर्ग-1 में कुल 382 शिक्षार्थी आए थे, जिनमें छत्तीसगढ़ से 78, महाकौशल से 85, मालवा से 118 और मध्यभारत से 97 चयनित स्वयंसेवक शामिल हुए। म्यांमार (ब्रह्मदेश) से भी 4 स्वयंसेवक वर्ग में आये थे। वर्ग के संचालन के लिए 19 अधिकारियों की संचालन टोली बनायी गई। इसके साथ ही शिक्षार्थियों के प्रशिक्षण के लिए प्रत्येक प्रांत से शिक्षक भी आए हैं। विभिन्न विषयों पर अखिल भारतीय, क्षेत्रीय एवं प्रांतीय अधिकारी भी शिक्षार्थियों का प्रबोधन करेंगे। 23 मई से आयोजित इस वर्ग में शिक्षार्थियों ने अनुशासित दिनचर्चा का पालन करते हुए संघ कार्य का प्रशिक्षण प्राप्त किया।

इस दौरान उन्हें संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत एवं सह-सरकार्यवाह श्री केसी मुकुंद का मार्गदर्शन भी प्राप्त हुआ। इसके अतिरिक्त क्षेत्रीय अधिकारियों एवं विषय विशेषज्ञों ने स्वयंसेवकों का प्रबोधन एवं प्रशिक्षण दिया।

स्मृति चिह्न के तौर पर भेंट किए आम के ‘सीड बॉल’, लहलहाएंगे पेड़ :

वर्ग में शामिल 382 शिक्षार्थियों, शिक्षकों, पालकों एवं अधिकारियों को स्मृति चिह्न के तौर पर आम के बीज से तैयार किए गए ‘सीड बॉल’ भेंट किए गए। वर्ग में ही कार्यकर्ताओं ने लगभग 1000 सीड बॉल तैयार किए थे। इन्हें रखने के लिए कागज के हस्तनिर्मित थैले भी बनाए। इन थैलों पर लिखा ‘आम के आम-गुठलियों के भी दाम’ महत्वपूर्ण संदेश देता है। सभी शिक्षार्थी एवं अन्य लोग सीड बॉल को अपने स्थान पर जाकर रोपेंगे। सीड बॉल से उगनेवाला आम का पेड़ कार्यकर्ता विकास वर्ग-1 की उनकी स्मृतियों को सदैव जीवंत रखेगा। संघ ने इस प्रयोग से शिक्षार्थियों को पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया है।

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