संविधान के मूल्यों को सोचो, समझो और प्रेक्टिस करो

रिपोर्ट: सतीश भारतीय सागर

सागरः सुरखी विधानसभा के बिहारीखेरा गांव में संविधान के मूल्यों पर आधारित जागरुकता शिविर आयोजित किया गया। शिविर का विषय ’संविधान के मूल्यों को सोचो, समझो और प्रेक्टिस करो’ रहा। इस आयोजन में स्वतंत्रता,समानता, न्याय, आर्थिक, समाजिक विकास जैसे संवैधानिक मूल्यों पर चर्चा की गयी। शिविर का उद्देश्य संवैधानिक मूल्यों के प्रति समझ विकसित करना और संविधान के प्रति प्रेम पूर्ण भावनाओं का विस्तार करना था।

इस शिविर में बिहारीखेरा निवासियों ने बताया कि संविधान में तो समानता और न्याय जैसे शब्द दर्ज है। लेकिन वास्तव में हमें सरकारी राशन की लाइन से लेकर सरकारी काम-काजों तक में असमानता दिखती है।

शिविर में इसका एक उदाहरण परमलाल ने पेश किया। उन्होनें बताया कि सरकार कुआं कुदवाने हेतु 2 लाख 50 हजार रुपए की सहायता देती है। लेकिन कुंए के लिए हमेें केवल 65 हजार रुपए ही मिले।

आगे की राशि के लिए हम छोटे अधिकारी से लेकर कलेक्टर और सीएम हेल्पलाइन नंबर 181 तक पर शिकायत कर चुके है। लेकिन न्याय नहीं मिला। वहीं अन्य बडे़ समुदायों के कई लोगों को 2 लाख 50 हजार रुपए की पूरी राशि मिली है। यहाँ गौर करने योग्य है कि यह असमानता क्यों है? क्या संविधान ऐसे व्यवहार की इजाजत देता है?

आगे आयोजन में अपने विचार रखते हुए भरत बोलते है कि हमारे गांव में आदिवासी और अनुसूचित जाति के लिए पीएम आवास योजना का लाभ नहीं मिला। लेकिन, बडे़ समुदायों को आवास योजना का लाभ मिला है। क्या संविधान में जिस सामाजिक न्याय का जिक्र किया गया, वह हमारे साथ हुआ? शायद नहीं। इसके उपरांत शिविर में लोगों ने जातिवाद, लैंगिक भेदभाव, घरेलु हिंसा, जैसी अन्य असमानताओं से किस तरह संवैधानिक मूल्यों का हनन होता है। इस पर चर्चा की और संविधान की उद्देशिका पढ़कर संवैधानिक मूल्यों के प्रति जागरुकता का प्रण लिया।

इस जागरुकता शिविर में देवेन्द्र, महेन्द्र, भरत, रामकृष्णन, गोविंद और सुरज जैसे कई ग्रामीण शामिल हुए। शिविर का आयोेजन विकास संवाद परिषद मेें फैलो पत्रकार सतीश भारतीय ने किया।