कबीर मिशन समाचार सुनील चौहान
प्रदेश सहित जिले में “जल गंगा संवर्धन अभियान” 30 मार्च से प्रारंभ हो रहा है। “जल गंगा संवर्धन अभियान” की तैयारियां अंतिम दौर में हैं। इस अभियान को सफल बनाने के लिए अमृत संचय अभियान की टीम द्वारा व्यापक तौर पर बैठकें ले रहे हैं। अमृत संचय अभियान टीम द्वारा टोंकखुर्द जनपद पंचायत कार्यालय में
“जल गंगा संवर्धन अभियान” एवं अमृत संचय अभियान को लेकर सभी सरपंचों की बैठक आयोजित की गई।अमृत संचय अभियान टीम के मनीष वैद्य और हिमांशु कुमावत ने टोंकखुर्द जनपद पंचायत में विकासखंड के सरपंचों को जलगंगा संवर्धन में जल संरचनाओं के निर्माण के लिए तकनीकी प्रशिक्षण देते हुए कहा कि
धरती का पानी लगातार ख़त्म होता जा रहा है, ऐसे में पानी की चिंता करना सबसे ज़रूरी काम है। सुनीता कौशल ने जल संरचनाओं के निर्माण में तकनीकी बारीकियों तथा मानक मापदण्ड के बारे में विस्तार से जानकारी दी। मनीष वैद्य ने कहा कि सरपंच इस अभियान से जुड़कर पानी की गंगा लाने वाले भागीरथ बनें।
टोंकखुर्द ने रेवा सागर निर्माण में अग्रणी भूमिका निभाते हुए देश में मॉडल बनाया था, पानी के इसी तरह के कामों की ज़रूरत आज भी है।“अमृत संचय अभियान” की टीम के भूजल वैज्ञानिक श्री हिमांशु कुमावत ने बताया कि मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने अपनी दूरगामी सोच और पानी के प्रति चिंता को ध्यान में रखकर इस
महत्त्वाकांक्षी अभियान को मध्यप्रदेश में शुरू किया है। क्षेत्र में भूजल के अति दोहन की वजह से जलस्तर काफ़ी नीचे चला गया है। जल संरचनाओं के बेहतर निर्माण से हम अपने गाँव, अंचल का जलस्तर बढ़ा सकते हैं। उन्होंने जल सरंचनाओं के निर्माण पर ज़ोर दिया। सहायक यंत्री निधि मण्डलोई
ने प्रशिक्षण में सरपंचों से आग्रह किया कि वे अपने गाँवो में अभियान के तहत पारम्परिक जल स्रोतों की साफ़-सफाई, मरम्मत और जीर्णोद्धार के साथ नई संरचनाओं का निर्माण तकनीकी मापदण्डों के अनुरूप कार्य करें। नावदा की सरपंच गायत्री मुकेश पटेल ने सभी सरपंचगणों से आग्रह किया।