अपने मित्र सुनील अहिरवार से। फिजिकल फिटनेस के टॉप यूटूबर् जितेंद्र सिंह पेरवाल बहुत प्रसिद्ध है इन्होंने
अपने जीवन में बहुत संघर्ष किया और आज जिस मुकाम पर पहुँचे सायद वहा इतनी जल्दी कोई नहीं पहुँच सके। डेढ़ करोड़ की डिफ़ेंडर कार खरीदी जिसकी स्पीड बहुत तेज है। जितेंदरसिंह पेरवाल का स्वागत पार्षद महोदय महेशबाबु, ओमप्रकाश अहिरवार
जो लगातार 20 वर्ष से पार्षद रहे है जितेंद्र सिंह के मित्र पंकज मालवीय, विनोद मालवीय, भरत भैरवे और सुनील ने स्वागत करते हुए स्वलहार के साथ शंकरकाका होटल पर भोजन के बाद इंदौर निकले। आज के समय में हर नव युवक मातृभूमि की रक्षा करने के लिए तत्पर रहते है कि हम फौज मे भर्ती हो जाए और देश की सेवा करे और इसी के लिए छात्र- छत्राओ को कड़ी मेहनत करवाते, जितेंद्र पेरवाल सर मित्र सुनील अहिरवार
(अक्षय कुमार) से मिलने पहुँचे तो एक नयी ऊर्जा प्राप्त हुई और दोनों ने पुराने दिन जब इंदौर मे जितेंद्र पेरवाल, सुनील अहिरवार और डॉ लखन बड़ौदिया एक साथ रूम पार्टनर रहे, जब जितेंद्र पेरवाल सर और सुनील अहिरवार पहली बार भर्ती देने सीहोर गए तब गजब ही मजा था
अनुशासन बिगाड़ने पर आर्मी वाले सर तुरंत दण्डा मारते थेजब भर्ती देने के लिए लाईन मे आगे बैठने के लिए दोड़ते है 100 लड़को के झुण्ड के नीचे अगर तुम नीचे दब जाओ तो कैसा लगेगा? हमारा जीव घुटने लगा और अब नहीं अब हम ज़िंदा नहीं बचेंगे तब कुछ लड़के घबराते हुए बोले राम- राम मार दिया रे बचालों तब हम दोनों जितेंद्र सिंह सर और सुनील अहिरवार को
बहुत हसी आई और मौत को भूल गये फिर आर्मी वाले सर ने ऊपर गिरने वाले सभी लड़को को डण्डे मारकर उठाया। वो भर्ती की रुनिंग दोनों से नहीं निकली लेकिन वही से जितेंद्र सिंह सर के ऊपर देशभक्ति का जुनून चढ़ गया और उनके दिमाग मे कुछ अलग करने की सोच आई।
पार्टनर रहते हुए गजब ही छोटी-छोटी बातो को लेकर हसी-मजाक,लडाई-झगड़े और आज मे बर्तन साफ नहीं करूॅगा और झाड़ू इसे लगाना है रोटी मे बेलुगा और शब्जी ये बनायेगा। जितेंद्र सिंह पेरवाल खूद ने सुनील अहिरवार के मातापिता को हाथ से बेलकर रोटी
खिलायी लेकिन वो एक समय था और आज भी यही व्यवहार है। रविवार को राधा स्वामी सत्संग खंडवा नाका इंदौर जाते जिससे आत्मा को शांति मिलती और खाने को लंगर भी। जितेंद्र सर रीजल्ट देखने होल्कर कॉलजे पहुँचे और पूरे नोटिस बोर्ड पर अक्षय कुमार का नाम ढूँढ़ा लेकिन मिले कैसे क्युकी रियल नाम तो सुनील
अहिरवार थाl पढ़ने का सबसे अच्छी जगह कोई डिस्ट्रब नही करे वो जगह बाथरूम है। पैसे बचाने के लिए बहुत पैदल चलते थे। एक बार सगाई के लिए जितेंद्र भाई के घर मेहमान आये और हम दोनों को जाना था लेकिन
गाड़ी दूसरे से माँग कर ले गए थे गाड़ी वाला बोलता है कि मे भी चलुंगा और उसे भी लेजाना पड़ाl बड़ा अच्छा लगता है जब पुरानी यादे याद करके एक नई एनर्जी आ जाती हैं। जय हिंद जय भारत