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कृषक रेज्ड बेड पद्धति एवं ब्राड बेड फरो पद्धति से सोयाबीन से फसल की बुआई करें – श्री दीक्षित

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अतिवर्षा एवं कम वर्षा में भी नहीं होगा फसल को नुकसान

कबीर मिशन – संतोष कुमार सोनगरा जिला ब्यूरो चीफ आगर मालवा आगर-मालवा, 27 मई/कृषक रेज्ड बेड पद्धति एवं ब्राड बेड फरो पद्धति से सोयाबीन की फसल की बुआई करें, इस पद्धति से सोयाबीन की बुआई करने पर अतिवर्षा एवं कम वर्षा दोनों की स्थिति सोयाबीन को किसी प्रकार की नुकसान नहीं होगा, यह बात कृषि विज्ञान केन्द्र आगर में कृषि अधिकरियों एवं कृषकों को रेज्ड बेड पद्धति एवं ब्राड बेड फरो पद्धति के संबंध में आयोजित प्रशिक्षण को सम्बोधित करते हुए प्रधान वैज्ञानिक एवं प्रमुख कृषि विज्ञान केन्द्र डॉ. एके दीक्षित ने कही।

उन्होंने कहा कि सोयाबीन की बुवाई को लेकर विस्तार से जानकारी दी, उन्होंने बताया कि पिछले कुछ वर्षों से हमें मौसम परिवर्तन का प्रकोप देखने को मिल रहा है अक्सर यह सुनने में आता है कि भारी बारिश होने की वजह से सोयाबीन की फसल ख़राब हो गई, खेतों में बारिश का पानी भरा होने के कारण फसल गल गई, इसके विपरीत सोयाबीन की फलियाँ बनते समय 12-15 दिनों का तक बारिश नहीं होने के कारण फलियों में दाना भराव पर विपरीत प्रभाव पड़ता है, जिससे उपज में गिरावट देखने को मिलती है। इन सभी कारणों को देखते हुए कृषकों को सोयाबीन की बुवाई बीबीएफ पद्धति (चौड़ी क्यारी व नाली पद्धति) या रेज़्ड बेड पद्धति (नाली सिंचित उभरी क्यारी पद्धति) द्वारा बुवाई करनी चाहिए, जिससे के सोयाबीन की फसलों में होने वाले नुकसान से बचा जा सकें।

उपसंचालक कृषि विजय चौरसिया ने बताया कि जिन कृषकों के पास सामान्य सीड ड्रिल (सामान्यतः 9 टाइन रिज फरों सीड ड्रिल) है, वह उसी सीड ड्रिल में रिजर का अटैचमेंट लगाकर, उसे बीबीएफ सीड ड्रिल में परिवर्तित कर, अपने फसल अवधि, क़िस्म एवं् फैलाव के अनुसार 5 पंक्तियों के बाद एक नाली बनाकर इस विधि से बुवाई का लाभ ले सकते हैं। प्रशिक्षण में सहायक कृषि यंत्री उज्जैन श्री पीएस सिसौदिया ने कृषकों को उक्त पद्धतियों को डेमो प्रदर्शन कर सोयाबीन की फसल की बुआई करने पर विस्तार से प्रशिक्षण दिया।क्या है बीबीएफ पद्धतिचौड़ी क्यारी व नाली पद्धति से सोयाबीन की बुवाई करने हेतु ट्रेक्टर द्वारा संचालित बीबीएफ सीडड्रिल का उपयोग किया जाता है। इस सीडड्रिल द्वारा एक साथ 5 पंक्तियों में बुआई की जा सकती है।

इसमें पंक्ति से पंक्ति की दूरी सोयाबीन की प्रजाति पर निर्भर करती है। कम फैलने वाली प्रजाति के लिए कतारों से कतारों की दूरी 35-40 सेमी. रखनी चाहिए तथा अधिक फैलने वाली प्रजाति के लिए कतारों से कतारों की दूरी 45 सेमी रखनी चाहिए। वहीं पौधे से पौधे की दूरी 4-5 सेमी तथा बुवाई की गहराई 2-3 बउ से अधिक नहीं होनी चाहिए। इस पद्धति में प्रत्येक 5 पंक्ति के बाद एक गहरी नाली बनती है, जिसकी चौड़ाई 40-45 सेमी. तथा गहराई 15-20 सेमी. तक होती है। बीबीएफ सीडड्रिल में नाली की गहराई चौड़ाई व पंक्ति से पंक्ति की दूरी को बढ़ाने व घटाने का प्रावधान होता है। कृषक अपने अपने खेत की मृदा व फसल की आवश्यकता अनुसार इसे घटा बढ़ा सकते हैं।

बीबीएफ से सोयाबीन की बुवाई करने के फ़ायदेबीबीएफ पद्धति से बुआई करने से परम्परागत विधि की अपेक्षा विपरीत परिस्थितियों जैसे की अधिक व कम वर्षा में भी सोयाबीन के अच्छे परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं। बीबीफ मशीन द्वारा गहरी नाली बनाकर अधिकतम वर्षा के दौरान जल की प्रभावी निकासी हो जाती है। जबकि समतल भूमि विधि में बुवाई करने पर वर्षा का जल खेत में ही संग्रहित हो जाता है, जिससे फसल ख़राब होने का ख़तरा बना रहता है बीबीएफ पद्धति से बुवाई करने पर कम वर्षा होने की स्थिति में भी वर्षा का जल गहरी नालियों में संग्रहित हो जाता है। जिससे पौधे को नमी प्राप्त होती रहती है। इसके विपरीत फसल अवधि में आवश्यकता पड़ने पर नालियों से सिंचाई करने की सुविधा उपलब्ध होती है।

फलस्वरूप पौधे में पानी की कमी नहीं होती, इसके साथ साथ चौड़ी क्यारी में बुवाई होने के कारण प्रत्येक पंक्ति को सूर्य की रोशनी व हवा पर्याप्त मात्रा में मिलती है जिससे पौधे के फैलाव को अधिक जगह मिलती है। जिससे पौधे की शाखाओं में वृद्धि होती हैं तथा अधिक मात्रा में फूल व फलियाँ बनती है परिणामस्वरूप उत्पादन में वृद्धि देखने को मिलती है। प्रशिक्षण मे कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. आरपीएस शक्तावत, तकनीकि सहायक मुकेश चंद्रपुरी, बीटीएम वेदप्रकाश सेन समस्त विकासखंड के वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी, समस्त कृषि विस्तार अधिकारी, बीटीएम सहित कृषकगण उपस्थित रहे।

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