वोटर्स को रिझाने लोक लुभावने पैकेज, चुनाव है या सौदाग़री

कबीर मिशन समाचार।

पवन शर्मा( 9407423966)

नीमच। इन दिनों की राजनीति अपने चरम पर है, हर पार्टी अपने अपने तरीकों से वोटरों को लोक लुभावने ऑफर देकर निष्पक्ष चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने में लगी है। मानो कोई होड़ सी लगी हो। आदर्श राजनीति का कोई आधार ही नही दिखता।
इस साल में 5 राज्यों के विधानसभा चुनाव है, अपनी अपनी सरकार बनाने के लिए पार्टियां लोगों को दे धनाधन लुभावने व आकर्षक ऑफर व योजनाओं का लालच देकर अपनी पार्टी की ओर आकर्षित करने की कार्ययोजना में लगी है।
पक्ष विपक्ष दोनो ही दल बस सत्ता पाने के लिए फोकट की रेवड़ियां बांटने में कोई कसर नही छोड़ रही है। क्या ये पार्टियां अपने पार्टी फण्ड से ये रेवड़ियां बांटती है। नही ये सब आपके और हमारे जेब से ही निकलती है।
टैक्स पेयर टैक्स दे और मजे ये सत्ता के लोलुभे करें। बात किसी एक राजनीतिक दल की नही रही, एक अब दूसरे दल के मेनिफिएस्टो को टक्कर देने के लिए तगड़ा आकर्षक मेनिफिएस्टो मार्केट में लाते है। कुछ महिलाओं के वोटों में लगे है तो कुछ युवाओं के वोटों की गणित में है।
जनता भी जानती है कि ये सब सिर्फ वोटरों को लुभाने के लिए बड़े बड़े दावे किए जाते है।
इन राजनीतिक दलों को लोगों को स्वालंबी बनाने के भरसक प्रयास करने चाहिए न कि उनको सरकारी योजनाओं और खेरात का आदि बनाना चाहिए। बरसों से चली आ रही ये परम्परा बदलनी चाहिए। सिर्फ सरकार बनाने का मकसद छोड़ जनता के रोजगार व स्वालंबन की ओर ध्यान देना प्राथमिकता होना चाहिए।
यहां तो एक पार्टी 1000 रु महिलाओं को देने कार्य मे लगी है तो दूसरी 1500 रु देने का वादा करने में लगी है। कोई फ्री बिजली देने की बोल रही है तो कोई फ्री यात्रा। ऐसी सौदाग़री का खेल देश को किस दिशा में ले जाएगी ये बड़ा सवाल है। क्या ये सब सही हो रहा है ऐसा करने से देश या प्रदेश मुफ्तखोरी का आदि नही होगा?