बडवानी

पेसा एक्ट ग्राम विकास के लिए बनाया गया है-कलेक्टर श्री शिवराजसिंह वर्मा

पेसा एक्ट ग्राम विकास के लिए बनाया गया है-कलेक्टर श्री शिवराजसिंह वर्मा

पेसा एक्ट ग्राम विकास के लिए बनाया गया है-कलेक्टर श्री शिवराजसिंह वर्मा

कबीर मिशन समाचार बड़वानी से अनिष भार्गव

बड़वानी 23 नवंबर 2022 / प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री शिवराजसिंह चैहान ने 15 नवंबर को जनजातीय गौरव दिवस के अवसर पर पेसा कानून प्रदेश के 20 जिलों के 89 विकासखण्डों में लागू किया है। बड़वानी जिले के सातों विकासखण्डों में भी पेसा नियम लागू हो गया है। प्रदेश के जनजातीय भाई-बहनों के लिए ये एक ऐतिहासिक निर्णय है और पेसा नियम की जानकारी जनजातीय भाईयो एवं बहनों को देने के लिए जिले में 24 नवंबर से 3 दिसम्बर तक ग्राम सभाओं का आयोजन किया जायेगा।
कलेक्टर श्री शिवराजसिंह वर्मा ने बुधवार को कलेक्टर कार्यालय के सभागृह में आयोजित बैठक के दौरान उक्त बाते कही। इस दौरान कलेक्टर श्री शिवराजसिंह वर्मा ने निर्देशित किया कि पेसा नियम के तहत पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग, जनजातीय कार्य विभाग, मछली पालन विभाग, वन विभाग, राजस्व विभाग, गृह विभाग, खनिज विभाग, वाणिज्य कर विभाग, जल संसाधन विभाग के आपसी समन्वय से कार्य होगा।
बैठक में कलेक्टर श्री शिवराजसिंह वर्मा, वनमंडलाधिकारी सेंधवा श्री अनुपम शर्मा, जिला पंचायत सीईओ श्री अनिल कुमार डामोर, वनमण्डलाधिकारी बड़वानी श्री एसएल भार्गव, अपर कलेक्टर श्रीमती रेखा राठौर, डाॅ. शालिनी श्रीवास्तव, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री आरडी प्रजापति, एसडीएम बड़वानी श्री घनश्याम धनगर सहित पेसा नियम से संबंधित विभागों के अधिकारी एवं वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से खंड स्तरीय अधिकारी, नोडल अधिकारी उपस्थित थे।
पेसा नियमों की 5 प्रमुख बाते
पेसा नियम के अंतर्गत जनजातीय समुदाय को मिलेंगे
ऽ जमीन के अधिकार
ऽ जल के अधिकार
ऽ जंगल के अधिकार
ऽ श्रमिकों के अधिकार का विशेष ध्यान
ऽ जनजातीय गौरव के संरक्षण और संवर्धन का अधिकार
पेसा एक्ट के सम्बंध में महत्वपूर्ण बातें
ऽ मध्यप्रदेश पेसा एक्ट किसी गैर जनजातीय समाज के खिलाफ नहीं है। यह जनजातीय भाई-बहनों को और मजबूत करने के लिए है। यह प्रदेश के जनजातीय बहुल 89 विकासखंडों में लागू होगा, शहरों में लागू नहीं होगा।
ऽ ऽ श्पेसा एक्टश् जनजातीय भाई-बहनों को जल, जंगल, जमीन और खदानों पर पहला अधिकार प्रदान करता है।
ऽ ऽ पेसा एक्ट में यह व्यवस्था की गई है कि पटवारी और बीट गार्ड हर साल गांव में आकर ग्रामसभा के बीच खसरे, नक्शे और बी । की नकल रखेंगे और यह बतायेंगे कि कौन सी जमीन किसके नाम है।
ऽ ऽ विकास कार्यों के लिए अब जनजातीय भाई-बहनों की अनुमति के बिना उनकी जमीन नहीं ली जा सकेगी।
ऽ ऽ अधिसूचित क्षेत्र में रेत, मिट्टी, पत्थर या कोई अन्य खदान का पट्टा बिना ग्रामसभा की अनुमति के सरकार नहीं दे सकेगी।
ऽ ऽ अचार की गुठली, महुए का फूल, महुए की गुल्ली, हर्रा, बहेड़ा, बांस, आंवला आदि को बिनने, बेचने और इनके मूल्य निर्धारण का अधिकार भी जनता का ही होगा।
ऽ तालाबों का समस्त प्रबंधन अब ग्रामसभाएं करेंगी। तालाबों में होने वाले सिंघाड़ों या मछलियों पर भी अधिकार ग्राम सभाओं का ही होगा। सरकार केवल मदद करेगी।
ग्राम सभा में बताई जाने वाली बाते
ऽ पेसा एक्ट की जानकारी देने के लिये ग्रामसभा का आयोजन होगा । जिसमें एक्ट की जानकारी ग्रामीणो को देकर उनके प्रश्नो का समाधान किया जायेगा । इसके पश्चात होने वाली ग्रामसभाओं में इसका क्रियान्वयन करवाया जायेगा और फलियो की आपस में दूरी है। फलियो के निवासी एसडीएम को आवेदन देकर पृथ्क से ग्रामसभा का आयोजन का प्रस्ताव दे सकते है।
ऽ पृथ्क से ग्रामसभा के लिये निवासरत 50 प्रतिशत लोगो के हस्ताक्षर व अंगूठा निशान प्रस्ताव पर हो ।
ऽ ग्रामसभा का आयोजन सार्वजनिक स्थानो पर हो तथा ग्राम में डोंडी पिटवाकर ग्रगामसभा की सूचना दी जाये ।
ऽ पेसा एक्ट में ग्रामसभा को वैधानिक अधिकार दिये गये है। साथ ही जल, जंगल, जमीन, श्रमिको के अधिकार एवं जनजातीय गौरव के संरक्षण और संवर्धन के लिये अलग-अलग समितियो का गठन किया जायेगा ।
ऽ समितियो में कम से कम 5 व अधिकतम 7 सदस्यो होंगे तथा एक तिहाई महिला सदस्य भी सम्मिलित होंगे ।

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