समाज सीहोर

आगामी दिनों में आस्था और उत्साह के साथ मनाई जाएगी मां कर्मा देवी की जयंती।

कबीर मिशन समाचार जिला सीहोर
सिहोर से संजय सोलंकी कि रीपोर्ट 9691163969

श्रीकृष्ण की अनन्य भक्त थी मां कर्मा देवी, सनातन धर्म के लिए गर्व की बात-डॉ. डीएन साहू

सीहोर। हर साल मां कर्मा देवी जयंती मनाई जाती है, देश भर में सनातन धर्म में आस्था और विश्वास रखने वाले सभी लोगों पूरे उत्साह के साथ मनाई जाएगी। इसके अलावा तेली समाज की आराध्य संत माता कर्मा पर फिल्म का जो निर्माण किया गया है। वह रामायण की तर्ज पर देश भर में रिलिज भी की जाएगी। उक्त विचार शहर के छावनी स्थित प्राचीन जगदीश मंदिर में साहू समाज के तत्वाधान में आयोजित पदाधिकारियों की बैठक के दौरान फिल्म प्रोड्यूसर डॉ. डीएन साहू ने कहे।

उन्होंने कहा कि हमारे समाज की आराध्य संत माता कर्मा पर फिल्म का निर्माण किया जाना तेली समाज के लिए गौरव का विषय है। हिंदी धार्मिक फिल्म मेरी मां कर्मा की समस्त टीम को फिल्म की सफलता के लिए शुभकामनाएं दी हैं। इस संबंध में जानकारी देते हुए साहू समाज के अध्यक्ष जितेन्द्र साहू ने बताया कि धार्मिक फिल्म मेरी मां कर्मा के प्रचार के लिए पॉपकॉर्न फिल्म प्रोडक्शन मुंबई के फिल्म प्रोड्यूसर डॉ. साहू, यूके साहू, संतोष राज साहू, अशोक कुमार साहू ने क्षेत्रवासियों को प्रचारक नियुक्त किया है। जो फिल्म रिलीज होने पर वे प्रदेश में घूमकर प्रचार करेंगे। इस मौके पर प्रचारकों को नियुक्ति पत्र भी सौंपे गए है। इसमें स्टार प्रचारक के रूप में विठलेश सेवा समिति के व्यवस्थापक समीर शुक्ला, जितेन्द्र साहु, धीरज साहू, मनोज दीक्षित मामा आदि शामिल है।

इस मौके पर यहां पर मौजूद श्री साहू ने कहा कि मां कर्मादेवी भगवान की महान भक्त थीं, इसलिए श्रीकृष्ण ने उन्हें साक्षात दर्शन दिए थे। तब माता ने अपने सामने बैठकर भगवान श्रीकृष्ण को खिचड़ी खिलाई थी। अत: इस दिन मां कर्मादेवी का पूजन-अर्चन अनिवार्य रूप से करने तथा खिचड़ी का भोग लगाकर प्रसाद बांटने की मान्यता है। इस दिन साहू तेली समाज द्वारा भक्त शिरोमणि मां कर्मादेवी की जयंती धूमधाम से मनाई जाती है।

साहू समाज की आराध्य देवी कर्मादेवी सेवा, त्याग और भक्ति समर्पण की देवी हैं। कर्माबाई की गौरव गाथा जनमानस में श्रद्धा तथा भक्तिभाव से वर्षों से चली आ रही है। मां कर्मादेवी का जन्म पापमोचनी एकादशी के दिन झांसी नगर में चैत्र कृष्ण पक्ष की एकादशी को हुआ था। उनमें बाल्यावस्था से ही धार्मिक कहानियां सुनने की रुचि हो गई थी। कर्माबाई को जितना भी समय मिलता था, वह समय वे भगवान श्रीकृष्ण के भजन-पूजन व ध्यान आदि में लगाती थीं। इस मौके पर अनेक वक्ताओं ने अपने विचार प्रकट किए। बैठक में महिला पदाधिकारियों के साथ बड़ी संख्या में समाजजन उपस्थित थे।

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