राजगढ़। कांग्रेसी नेता महेश आनंदीलाल ब्यावरा ने पटवारियों की सांठ गांठ से 10 बीघा शासकीय जमीन बेच दी,भृष्ट अधिकारी कमलेश भार्गव द्वारा शासकीय जमीन बेचने वाले नेता को बचाने का प्रयास दोषी पर अभी तक कोई कार्यवाही नहीं।

राजगढ़ मध्यप्रदेश। कबीर मिशन समाचार

राजगढ़। मामला राजगढ़ जिले का है जहां पत्रकार माखन विजयवर्गीय ने आरटीआई से मिली जानकारी के बाद शासकीय जमीन को पट्टे की भूमि बताकर बेचने की शिकायत की थी। एक ही दस्तावेज में की गई तीनो शिकायत सही पाई गयी। शिकायत के बाद 24 फरवरी को जांच समिति ने सौंपे प्रतिवेदन के अनुसार तत्कालीन अपर कलेक्टर बीएस कुलेश, एसडीएम कमलेश भार्गव, तहसीलदार संजय चोरसिया, ब्यावरा की तत्कालीन तहसीलदार अनितासिंह दोषी पाए जाने पर विभागीय जांच प्रस्तावित की गई।

साथ ही तत्कालीन एसडीएम रीडर मुस्लिम खान, अपर कलेक्टर रीडर केके जाटव निलंबित किए गए जो अब तक निलंबित है। मामले में अपर कलेक्टर ने 24 फरवरी को प्रतिवेदन कलेक्टर राजगढ़ हर्ष दीक्षित को सौंपा, एवं धारा 51 के तहत प्रकरण को पुनर्विलोकन के लिए कहा।
उक्त घटनाक्रम में तत्कालीन एडीएम बीएस कुलेश एसडीएम कमलेश भार्गव , तहसीलदार संजय चौरसिया दोषी पाए गए।
24 फरवरी 2022 को कमिश्नर भोपाल के पास भेजे गए प्रतिवेदन का जवाब नही मिलने पर विजयवर्गीय ने 10 जून को सीएम हेल्पलाइन पर शिकायत की जो आज भी चौथे लेवल पर पेंडिंग है।


अब घोटालेबाज अफसर का डीपीसी में नाम
राजगढ़ की 10 बीघा शासकीय जमीन को कांग्रेस नेता को सौंपकर बिकवाने के दोषी एसडीएम कमलेश भार्गव के खिलाप दो माह पहले जांच अधिकारी एडीएम ने आरोप पत्र जारी किए थे। फरवरी माह से डीई प्रपोजल कमिश्नर के यहां लंबित है।
लेकिन प्रमुख सचिव राजस्व (कार्मिक) के यहां आगामी दिनों में होने वाली डीपीसी में कमलेश भार्गव का नाम है।

मुख्यमंत्री जी कहते है कि भृष्टाचार नही होने दूंगा, साहब आपके अधिकारी भृष्ट अधिकारी पैदा कर रहे है। आप तो क्या अब आपके देवता भी भृष्टाचार नही रोक पा रहे हैं।
महेश आनंदीलाल और पटवारियों की थी सांठ गांठ
कांग्रेसी नेता महेश आनंदीलाल ब्यावरा ने पटवारियों की सांठ गांठ से खिमाखेड़ी में 10 बीघा शासकीय रकबा बेच दिया। और सर्वे नम्बर दिया गया 87/4/1, जिसके अब तीन अलग अलग बटांकन है। उक्त सर्वे में रकबा 2.529 हे. है। मूल सर्वे क्रमांक भी अस्तित्व में है और बटांकन सर्वे नम्बर भी अस्तित्व में है।


मप्र भूराजस्व संहिता पढा हुआ एक अदना सा पटवारी भी यह बात जानता है कि बटांकन होते ही मूल सर्वे नम्बर विलोपित हो जाता है और बटांकन नम्बर अस्तित्व में रहते है।
यहां एक ही नम्बर की जमीन दो जगह अस्तित्व में होने के बावजूद कमिश्नर मालसिंह 10 महीने में भी कह रहे है समझ मे नही आया। मेने कमिश्नर से रूबरू बातचीत में कहा कि समझना नही चाहते या समझ मे नही आया। अथवा एक भृष्ट अधिकारी कमलेश भार्गव और शासकीय जमीन बेचने वाले कांग्रेसी नेता को बचाने का प्रयास कर रहे है। भोपाल संभागायुक्त और राजगढ़ कलेक्टर पर घोटालेबाज अफसर का प्रतिवेदन बदलने एवं आरोपपत्र के बाद भी जेएडी , पीआरसी एवं पीएस को प्रपोजल बदलकर भेजने के आरोप है।

इस मामले में नीमच के एक व्यक्ति ने आरोपी अधिकारी और संभागायुक्त के बीच की कड़ी का काम किया है। आरोप पत्र जारी होने के बावजूद डीपीसी में कमलेश भार्गव का नाम है। और यह भी सही है कि राजगढ़ जिले में दिग्विजयसिंह के खास व्यक्ति भृष्टाचारी महेश आनंदीलाल ब्यावरा को बचाने के लिए राजगढ़ कलेक्टर जी जान से लगे है। इसलिए यह कहने में कोई संकोच नही होना चाहिए कि राजगढ़ जिले में आज भी दिग्विजयसिंह और भृष्टचार का राज्य है।
माखन विजयवर्गीय
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