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October 6, 2022

राजनीति में अनजाना भय और युवा पौध की राजनीति गलाने का षड्यंत्र

कबीर मिशन समाचार।

पवन शर्मा✍🏻
आजकल देश की तमाम राजनीतिक पार्टिया युवाओं पर ज्यादा फोकस कर रही है। हर संगठन में उनको तवज्जों दी जा रही है। हर दल राष्ट्रीय स्तर पर इस बात जोर दिया जा रहा है कि युवाओं की संगठन और सत्ता में भागीदारी उनके दल को मजबूती प्रदान करेगा। हर दल में यूथ विंग बनी है। यहां तक की चुनावों में भी इनकी भागीदारी सुनिश्चित की जा रही है। युवा सोच के साथ देश को मजबूत करने के संकल्प भी लिए जा रहे है। चाहे कांग्रेस हो या भाजपा राष्ट्रीय स्तर पर युवाओं को अवसर प्रदान करने का मानस बना बैठी है।
लेकिन कड़वा सत्य यह है कि केंद्रीय स्तर पर तो युवाओं के राजनीतिक भविष्य तय करने के प्रयास हो रहे है लेकिन नीचे आते आते फिर वो ही ढर्रा बिगड़ रहा है। संगठन में तो युवाओं को फिर भी अवसर मिल रहा है लेकिन सत्ता में ना जाने क्यों अनजाने भय से युवा पौध की राजनीति गलाने का षड्यंत्र का खेल प्रभाव के दम पर खेल दिया जाता है। अनजाना भय ऐसा की कोई नया चेहरा आगे ना आ जाए। कही आगे ना बढ़ जाए। कहीं राजनीति खतरे में ना पड़ जाए। छोटे चुनाव हो या बड़े सबको अपनी अपनी पड़ी है। युवा बस दरिया बिछाने, नारे लगाने और झंडे तोकने तक ही सीमित हो जाते है।
ऊपरी स्तर (केंद्रीय स्तर) पर तो युवाओं को मौका देने पर जोर दिया जाता है। उन्हें पर्याप्त अवसर देने के फॉर्मूले पर रणनीति बनती है लेकिन नीचे आते आते सब धरी की धरी रह जाती है। स्थानीय स्तर पर बड़े नेता नई पौध को उगने देने से कतराते है। शायद कुछ एक को अवसर भी दिया जाता है तो वो भी गुटबाजी के दम पर। अभी हाल ही में हुए निकाय चुनावों में भी देखने को मिला कि पार्षद जैसे पद पर संगठन या पार्टी के बड़े बड़े दिग्गज ठस गए, युवाओं का हक मार कर पार्षद बनने के लिए गिर पड़े। कुछ एक युवाओं को ही मौका मिल पाया। अधिकांश जगह पुराने नेताओं को ही जगह मिली।
बात करें बड़े चुनावों की तो विधानसभा चुनावों की तो एक बार जो विधायक बन जाए वो ही हर बार विधायक बनना चाहता है या उसे टिकट ना मिले तो उसके ही परिवार में वो टिकट जाना चाहिए है। आखिर ऐसे में भला नए को अवसर कब मिलेगा।
कांग्रेस में कई वर्षों से वो ही पुराने चेहरे देखने को मिलते है तो बीजेपी भी अब उसी राह पर चल पड़ी है।
विधानसभा जैसे चुनावों में भी युवाओं को आगे बढ़ने से रोकने के प्रयास होते दिखाई दे रहे है। जब युवाओं को आगे बढ़ाना ही नही है तो ऐसे फॉर्मूला लाए ही क्यों जाते है।