इंदौर। गलतफहमियां से टूट रहे रिश्तों को बचाया गया

वन स्टॉप सेंटर के प्रयास से पति-पत्नी अपने रिश्ते को सुदृढ़ बनाने के संकल्प के साथ रहने को हुये राजी।

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महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा संचालित वन स्टॉप सेंटर रिश्तों को संवारने, रिश्तों को बचाने और महिलाओं के उनके अधिकार दिलाने के लिये निरंतर प्रयत्नशील है। इस सेंटर द्वारा छोटी-मोटी गलतियों से बिगडने वाले रिश्तों को बचाया जा रहा है।
इसी कड़ी में एक प्रकरण में महिला सीमा (परिवर्तित नाम) ने वन स्टॉप सेंटर पर परामर्श के लिए आवेदन दिया। केस वर्कर सुश्री शिवानी श्रीवास ने सभी कार्यालयीन औपचारिकता पूर्ण कर प्रशासक डा वंचना सिंह परिहार से विमर्श कर प्रकरण परामर्शदात्री सुश्री अलका फणसे के पास भेजा। महिला एक सप्ताह से माता-पिता के पास रह रही थी। प्रथम एकल परामर्श सत्र में ज्ञात हुआ की सीमा के पति रौनक ने उससे घर के बाहर सड़क पर मारपीट की। पति शक करता है। बाहर जाने पर वीडियो कॉल करता है। यूं तो आर्थिक रूप से कोई दिक्कत नहीं, पति मेरा और बच्चों का ख्याल भी रखते हैं। घर में पहले भी बहस हुई है, थोड़ी बहुत मारपीट भी हुई, पर इस बार जब घर के बाहर आकर मारा, तब मैं आहत हुई और यहां आवेदन दिया। मैं अपना घर नही तोड़ना चाहती पर ऐसी परिस्थिति में में पति के साथ नही रहूंगी।


तदुपरांत परामर्शदात्री सुश्री अलका फणसे ने रौनक के साथ एकल परामर्श सत्र लिया। उसकी शिकायत थी की पत्नी बच्चों के खाने-पीने का ध्यान नहीं रखती है। मेरा दूध का व्यवसाय है तो मैं सुबह 5 बजे से ही व्यस्त हो जाता हूं। शक करने की बात पर उसने कहा की मैने सीमा को जॉब करने से भी नही रोका, पर वहां ये किसी लड़के के साथ घूमती थी। उसने मेरी पत्नी को मैसेजेस भी किये थे। अभी पत्नी मुंह बोले भाई की शादी में गई थी। मैं भी था वहां फिर मैं वापस आ गया। पत्नी रिसेप्शन के लिए रुक गई। शादी में वहीं लड़का भी था। इसलिए मेरा दिमाग खराब हो रहा था। इसलिए मैं पत्नी को वीडियो कॉल कर रहा था। फिर दोनो का संयुक्त सत्र हुआ सीमा ने बताया की पति ने रिसेप्शन से मुझे 5 मिनट में घर पहुंचने को बोला। नहीं तो मैं वहां आकर तमाशा करूंगा ऐसा कहा। बस फिर मैं घर वापस आ गई। तब पति ने शराब पी रखी थी।

आते ही मुझे गंदे शब्द बोले, तब मैने भी गुस्से में पलट कर जवाब दिया। पति ने मुझे मारा। मैने कहां मैं अब तुम्हारे साथ नही रहूंगी। मैं अपने घर जा रही। बैग भरकर मैं बाहर निकली तब पति ने बाहर आकर मारा, जिससे मैं बहुत आहत हुई। प्रथम तो रौनक को आगाह किया गया की किसी भी परिस्थिति में पत्नी पर हाथ उठाना अनुचित है। पत्नी के चाहने पर कार्यवाही भी हो सकती है। परामर्श सत्र के दौरान रौनक को इस बात का एहसास हुआ की ऑफिस के युवक ने सीमा को अनावश्यक और गलत मैसेज किए इसमें सीमा का दोष नहीं है क्योंकि उसके तुरंत बाद सीमा ने उस युवक से बातचीत बंद कर उससे सारे संबंध समाप्त कर दिए और पूर्व में एक दो बार सीमा युवक के साथ ऑफिस के काम से गई थी क्योंकि उसका लोन और पॉलिसी का काम था वह भी बंद कर दिया। रौनक को उन बातों को अपने दिमाग पर हावी न होने देने के लिए फोकस शिफ्ट करने की तकनीक से अवगत करवाया गया। काम से समय निकालकर पत्नी व बच्चों को समय देना भी सुखी जीवन के लिए आवश्यक है यह बताया गया। सीमा तो अपना जॉब भी छोड़ने के लिए तैयार थी। लेकिन यह निर्णय लेना सही नहीं है और न ही समस्या का समाधान। इस बात पर भी दोनो पति-पत्नी सहमत हुए। सीमा को भी चर्चा कर बच्चों को मारने के क्या गलत परिणाम हो सकते हैं, और गलती करने पर उन्हे किस तरह से हैंडल किया जाना चाहिए, इस पर भी चर्चा की गई। अंततः दोनो पति-पत्नी अपने रिश्ते को सुदृढ़ बनाने के संकल्प के साथ घर रवाना हुए।