उज्जैन मध्यप्रदेश

“भोले-शंभू, भोलेनाथ” के जयकारों से गूंजा भगवान श्री महाकाल का सभामंडप, सवारी से पहले भगवान महाकाल का पूजन-अर्चन किया, धूमधाम से निकली श्रावण अधिक माह चतुर्थ सवारी

“भोले-शंभू, भोलेनाथ” के जयकारों से गूंजा भगवान श्री महाकाल का सभामंडप, सवारी से पहले भगवान महाकाल का पूजन-अर्चन किया, धूमधाम से निकली श्रावण अधिक माह चतुर्थ सवारी

उज्जैन 31 जुलाई। भगवान श्री महाकालेश्वर की श्रावण माह में निकलने वाली सवारियों के क्रम में चौथे सोमवार को सायं 04 बजे परम्परानुसार श्री महाकालेश्वर भगवान की सवारी धूमधाम से निकली। सवारी में भगवान श्री महाकालेश्वर ने चार विभिन्न स्वरूपों में भक्तों को दर्शन दिये। जिसमें पालकी में श्री चन्द्र्मोलेश्वर, हाथी पर श्री मनमहेश, बैलगाडी में गरूड पर शिवतांडव एवं बैलगाडी में नंदी पर श्री उमा-महेश के स्वरूप में विराजमान होकर अपनी प्रजा का हाल जानने निकले।

श्री महाकालेश्वर भगवान की सवारी निकलने के पूर्व श्री माखन सिंह चौहान, केबिनेट मंत्री व अध्यक्ष मध्यप्रदेश तीर्थ स्थान एवं मेला विकास प्राधिकरण, श्री विभाष उपाध्याय, उपाध्यक्ष मध्यप्रदेश जनअभियान परिषद,श्री कुमार पुरुषोत्तम कलेक्टर एवं अध्यक्ष श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति, आचार्य श्री शेखर जी महाराज, ने महाकालेश्वरर मंदिर के सभामंडप में भगवान श्री चन्द्र मोलेश्विर का पूजन-अर्चन किया गया। पूजन शासकीय पुजारी पं. घनश्यािम शर्मा द्वारा संपन्न् कराई गई।

श्री महाकालेश्वर मंदिर परिसर के सभामंडप में श्री पंचायती महानिर्वाणी अखाड़े के महंत श्री विनीत गिरि महाराज, महापौर श्री मुकेश टटवाल, उज्जैन उत्तर विधायक श्री पारसचंद्र जैन, श्रीमती कलावती यादव अध्यक्ष नगर पालिक निगम उज्जैन, आयुक्त नगर पालिक निगम श्री रोशन सिंह, प्रशासक श्री संदीप सोनी, मंदिर प्रबंध समिति सदस्य पुजारी प्रदीप गुरु, श्री राजेंद्र शर्मा ‘गुरु’, श्री राम पुजारी आदि ने भगवान श्री महाकालेश्वर का पूजन-अर्चन किया और आरती में सम्मिलित हुए। इस दौरान सहायक प्रशासक श्री मूलचंद जूनवाल, श्री प्रतीक द्विवेदी, सहायक प्रशासनिक अधिकारी श्री आर.के तिवारी आदि उपस्थित थें। सभी गणमान्यो में पालकी को कंधा देकर नगर भ्रमण हेतु रवाना किया।

कहारों द्वारा पालकी जैसे ही मंदिर के मुख्य द्वार पर पहुंची वहां सशस्त्रद पुलिस बल के जवानों द्वारा पालकी में विराजित भगवान को सलामी (गार्ड ऑफ ऑनर) दी गई। उसके पश्यात भगवान श्री चन्द्रमौलेश्वर की पालकी परंपरानुसार अपने निर्धारित मार्ग से होते हुए रामघाट पहुची ।

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